वनौषधि

फीता कृमि एवं खाज – खुजली की अचूक औषधि है सुपाड़ी : वनौषधि – 49

प्रचलित नाम- सुपारी, पुंगीफल। प्रयोज्य अंग-मूल, पत्र एवं बीज । स्वरूप- लम्बा पतला पाम जैसा वृक्ष, 40-60 फीट ऊँचा, पुष्प...

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कदम सर्पदंश मे भी है उपयोगी, जानिए इसके गुण : वनौषधि – 45

प्रचलित नाम- कदमप्रयोज्य अंग-मूल, कांड की छाल, पत्र, पुष्प तथा फल । स्वरूप-विशाल कद के वृक्ष, पत्ते अभिमुखी तथा उपपत्र...

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कालमेघ एक रामवाण औषधि : वनौषधि – 44

प्रचलित नाम- कालमेघ, चिरायता प्रयोज्य अंग-पंचांग, पत्र एवं मूल ।स्वरूप - एक वर्षायु उन्नत शाखीत गुल्म, कांड चतुष्कोणक, पत्ते अभिमुखी,...

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जानिए रक्तपुष्पी के औषधीय गुण: वनौषधि – 43

प्रचलित नाम- काकांगी, अंत्रमूल, रक्तपुष्पी, काकनासा, काक तुण्डी।प्रयोज्य अंग- पंचांग, मूल, पत्र एवं पुष्प ।स्वरूप-छोटी चिरस्थायी गुल्म, लघु दुग्ध रस...

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दमनक या दौना बच्चों के लिये एक दिव्य औषधि : वनौषधि – 41

प्रचलित नाम- दवना/दौना प्रयोज्य अंग- पंचांग । स्वरूप-गुल्म जैसा लम्बा सुगंधित क्षुप, आधे से ढाई मीटर ऊँचे, पत्ते लम्बे पतले...

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श्वेतमुशली/तालमूली, वनौषधि – 40

प्रचलित नाम- सफेद मुशली/खैरूव।प्रयोज्य अंग- रसदार मूल एवं पत्राभास कांड।स्वरूप- विशाल कंटकीय लता, शाखाएँ झुकी हुई धारदार, कंटक 1-2से 3-4...

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