संस्कृति और विरासत

कृष्ण की हथेली पर सजी थी कर्ण की चिता : मै अंग हूं – 17

कर्ण की इहलीला खत्म हो चुकी थी। बच गये थे कृष्ण, जिन्हें कर्ण की अंतिम इच्छा पूरी करनी थी। कुंवारी भूमि पर चिता सजाकर। मगर, कहां मिलेगी ऐसी भूमि ? कृष्ण के समक्ष एक चुनौती भरा प्रश्न ! कहते हैं,...

अंत समय में भी दानवीर बना रहा कर्ण : मैं अंग हूं – 16

ईस बात को सभी जानते हैं कि जिस  महाभारत युद्ध को अपने शस्त्र और शौर्य के दम पर अंगराज कर्ण ने दो दिन आगे बढ़ाया था अर्थात 16 दिन में समाप्त हो जाने वाले 'महाभारत' को 18 दिनों तक चलने...

कर्ण की चिताभूमि बनने का गौरव प्राप्त हुआ ‘चांदन’ को : मैं अंग हूं – 15

झारखंड का वह संतालपरगना (देवघर) हो गया है, जो कभी अंग देश का अभिन्न अंग हुआ करता था। बात चूंकि कर्ण और अतीत वर्तमान के कर्णगढ़ तथा खोदाई से प्राप्त पुरासामग्रियों पर चल रही है, लिहाजा अपनी कथा बांचने के...

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग, कथा, इतिहास और महत्व : ज्योतिर्लिंग – 2

गुजरात राज्य के काठियावाड़ क्षेत्र में समुद्र के किनारे विश्वप्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग, सोमनाथ ज्योतिर्लिंग हैं। यह ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर में स्थापित है। पहले इस क्षेत्र को प्रभासक्षेत्र के नाम से भी जाना जाता था।हमारे पुराणों के अनुसार सोमनाथ ज्योतिर्लिंग भगवान शिव...

ज्योतिर्लिंग क्या है? पृथवी पर महादेव के कितने ज्योतिर्लिंग हैं : ज्योतिर्लिंग – 1

वेद और पुराणों के अनुसार जहां जहां महादेव स्वयं प्रगट हुए उन स्थलों पर महादेव शिव के शिवलिंग की ज्योतिर्लिंग के रूप में पूजा की जाती है। महादेव शिव के 12 ज्योतिर्लिंग हैं। इस सीरीज में हम भगवान महादेव से...

श्रावण / सावन का महीना

भोलेनाथ को सबसे प्रिय है यह महीना। महादेव ने स्वयं कहा है— द्वादशस्वपि मासेषु श्रावणो मेऽतिवल्लभ: । श्रवणार्हं यन्माहात्म्यं तेनासौ श्रवणो मत: ।। श्रवणर्क्षं पौर्णमास्यां ततोऽपि श्रावण: स्मृत:। यस्य श्रवणमात्रेण सिद्धिद: श्रावणोऽप्यत: ।। अर्थात मासों में श्रावण मुझे अत्यंत प्रिय...

गुरु पूर्णिमा  या आषाढ़ पूर्णिमा

आषाढ़ पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहते हैं। सनातन संस्कृति में गुरु देवता को तुल्य माना गया है। गुरु को हमेशा से ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समान पूज्य माना गया है। वेद, उपनिषद और पुराणों का प्रणयन करने वाले...

वे आज भी जीवित हैं – भाग – 2 (राजा बलि) 

वे जो युगों युगों से आज भी जीवित हैं। पढिये राजा बलि की कहानी। पौराणिक कथाओं के अनुसार ब्रह्मा के पुत्र ऋषि कश्यप थे। कश्यप ऋषि की पत्नी अदिति के दो पुत्र हिरण्यकश्यप और हिरण्याक्ष हुए। हिरण्यकश्यप के 4 पुत्र...

आचार्य कणाद “एक वैज्ञानिक”

अणु, परमाणु, गति एवं गरुत्वाकर्षण के सिद्धांत व नियमों की व्याख्या कणाद ने हजारों वर्ष पहले की थी। महर्षि कणाद,  वायुपुराण के अनुसार उनका जन्म स्थान प्रभास पाटण बताया जाता है। वे उलूक, कश्यप, पैलुक आदि नामों से भी प्रख्यात...

सनातन ज्ञान परंपरा: इस्लाम-ईसाई धर्म के उदय से पहले फल-फूल चुकी थी

5000 वर्षों से अधिक समय से भारत उस बौद्धिक संपदा का धनी रहा जो मानव जाति के लिए सर्वोत्तम बिन्दु था। विश्व की सबसे पुरातन सभ्यता, भारत की ज्ञान और विज्ञान की एक महान परंपरा रही है। यदि प्राचीन भारत...

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