मुंगेर: तारापुर, असरगंज तथा बांका जिला के बेलहर एवं शंभुगंज प्रखंड की सीमा के बीचोंबीच बहने वाली बडुआ नदी इलाके के किसानों के लिए जीवनदायिनी मानी जाती है. किसानों के खेतों की सिंचाई का मुख्य साधन बड़ुआ नदी ही है.
बरसात के दिनों में इसके चालू हो जाने के बाद इससे निकलने वाली छोटी-छोटी नदियों में भी पानी जाने से इलाके के किसानों की खेती की सिंचाई आसानी से होती थी. परंतु नदी बेसिन से बालू के उठाव होने के कारण धीरे-धीरे सहायक नदियों में नदी का पानी जाना बंद हो गया. जिससे इससे निकलने वाली डांड़ भी मृत होने लगे और निचले इलाके में नहर का पानी पहुंचने में कठिनाई होने लगी तथा नदी का पानी बहकर गंगा में विलीन हो बर्बाद हो जाता है.
इसी समस्या को ध्यान में रखकर 35 वर्ष पूर्व तारापुर के समीप छत्रहार बडुआ तट पर कॉजवे का निर्माण कराया गया था . इसका निर्माण हो जाने से मुंगेर एवं जमुई के लोगों को बांका जाने के लिए एक नजदीकी मार्ग मिल गया.वहीं, इसमें फाटक लग जाने के कारण नदी से बर्बाद होने वाला पानी लिफ्ट होकर खैराती एवं अठोरिया केनाल के माध्यम से निचले इलाके के खेतों तक पहुंचने लगा.
परंतु यह कॉजवे विभागीय उदासीनता तथा स्थानीय जनप्रतिनिधि के रुचि नहीं लेने के कारण जर्जरावस्था में पहुंच चुका है. वहीं बरसात के दिनों में लोगों को यह पता ही नहीं चलता कि यह बरसाती नाला है या कावेज. वर्तमान में इसकी जल्द मरम्मती नहीं कराई गई तो लाखों की आबादी का कनेक्टिविटी तथा हजारों एकड़ भूमि की सिंचाई पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है.

