रांची: खोरठा साहित्य संस्कृति परिषद के तत्वाधान में आज प्रेस क्लब के सभागार में श्रीनिवास पानुरी की जयंती को खोरठा दिवस के रूप में मनाया गया.
समारोह के प्रारंभ में परिषद के सचिव सुजीत कुमार ने विषय प्रवेश कराया और अपने संबोधन में कहा कि खोरठा भाषा को लिपिबद्ध करने एवं खोरठा साहित्य के विभिन्न विधाओं को स्वरूप देने में श्रीनिवास पानुरी का उल्लेखनीय एवं अविस्मरणीय योगदान है.
खोरठा भाषा काफी पुराना है और इसके साहित्य का विकास हुआ है. बड़ी संख्या में लोग खोरठा भाषा भाषी हैं बावजूद इसके खोरठा उपेक्षित है. मौजूदा पीढ़ी की यह जवाब देही एवं जिम्मेवारी है कि खोरठा भाषा को इतना समृद्ध बनाएं कि आने वाली पीढ़ी खोरठा को और व्यापकता प्रदान कर सके.
इस क्रम में प्रोफेसर बीरबल महतो ने खोरठा भाषा के विकास में सब को आगे आने की अपेक्षा जताया. प्रोफेसर गजाधर प्रभाकर ने श्रीनिवास पानुरी को छायावादी एवं जनवादी कवि बताया और कहा कि खोरठा भाषा की पढ़ाई के लिए पुस्तक प्रकाशित करने में परिषद को आगे आना चाहिए.
कोषाध्यक्ष दिनेश दिनमणि ने श्रीनिवास पानुरी को खोरठा भाषा का पुरोधा बताया और इस परंपरा को आगे बढ़ाने पर जोर दिया. प्रोफेसर कुमारी शशि ने अपने संक्षिप्त उद्गार में खोरठा भाषा के विकास में श्रीनिवास पानुरी के अतुलनीय योगदान पर समारोह में आए लोगों का ध्यान आकृष्ट कराया.
समारोह में डॉ अर्चना कुमारी, राजेश कुमार, उमेश प्रसाद एवं नागेंद्र यादव ने अपने-अपने विचार व्यक्त किए. समारोह का संचालन विक्की कुमार एवं अंत में धन्यवाद ज्ञापन अनाम ओहदार ने किया.
समारोह में शालिनी देवी , संदीप महतो, विनोद महतो, शेखर वर्णवाल, बसंत महतो, सिद्दीकी अंसारी, मोती कुमार, राकेश कुमार, शेखर कुमार एवं विनोद महतो रसलीला सहित खोरठा भाषा साहित्य प्रेमी बड़ी संख्या में मौजूद थे.

