BnnBharat | bnnbharat.com |
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य
No Result
View All Result
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य
No Result
View All Result
BnnBharat | bnnbharat.com |
No Result
View All Result
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य

सादगी पूर्वक स्थापना दिवस मना, पर उत्साह में कोई कमी नहीं: रामेश्वर उरांव

by bnnbharat.com
November 15, 2020
in समाचार
प्रवासी श्रमिकों के बीच सहायता राशि हस्तांरित करने की प्रक्रिया शुरू: रामेश्वर उरांव
Share on FacebookShare on Twitter

रांची: अलग झारखंड राज्य स्थापना दिवस और भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सह राज्य के वित्त तथा खाद्य आपूर्ति मंत्री डॉ. रामेश्वर उरांव ने राज्यवासियों को बधाई और शुभकामनाएं दी है. 

प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामेश्वर उरांव ने अपने बधाई संदेश में कहा कि कोरोना संक्रमण काल में झारखंड राज्य भले ही अपना स्थापना दिवस सादगीपूर्वक मना रहा है, लेकिन उत्साह में कमी कोई नहीं आयी है. उन्होंने कहा कि अमर शहीद भगवान बिरसा मुंडा ने झारखंड के विकास का जो सपना देखा था, उसे राज्य सरकार पूरा करने में जुटी है.

डॉ. रामेश्वर उरांव ने भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि  बिरसा मुंडा भी ऐसे ही एक युगांतरकारी शख्सियत थे, जिन्होंने आदिवासी जनजीवन के मसीहा के रूप में केवल 25 सालों में बिहार, झारखंड और ओडिशा में जननायक की पहचान बनाई.आज भी आदिवासी जनता बिरसा मुंडा को भगवान की तरह याद करती है.

उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के खिलाफ आजादी की लड़ाई में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी. उन्होंने आदिवासी जनजीवन अस्मिता एवं अस्तित्व को बचाने के लिये लम्बा एवं कड़ा संघर्ष किया. वे महान् धर्मनायक थे, तो प्रभावी समाज-सुधारक थे. वे राष्ट्रनायक थे तो जन-जन की आस्था के केन्द्र भी थे. सामाजिक न्याय, आदिवासी संस्कृति एवं राष्ट्रीय आन्दोलन में उनके अनूठे एवं विलक्षण योगदान के लिये न केवल आदिवासी जनजीवन बल्कि सम्पूर्ण मानव जाति सदा उनकी ऋणी रहेगी.

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि   आदिवासियों का संघर्ष अट्ठारहवीं शताब्दी से आज तक चला आ रहा है. 1766 के पहाड़िया-विद्रोह से लेकर 1857 के गदर के बाद भी आदिवासी संघर्षरत रहे. सन् 1895 से 1900 तक बिरसा मुंडा का महाविद्रोह ‘ऊलगुलान’ चला. आदिवासियों को लगातार जल-जंगल-जमीन और उनके प्राकृतिक संसाधनों से बेदखल किया जाता रहा और वे इसके खिलाफ आवाज उठाते रहे. 1895 में बिरसा ने अंग्रेजों की लागू की गयी जमींदारी प्रथा और राजस्व-व्यवस्था के खिलाफ लड़ाई के साथ-साथ जंगल-जमीन की लड़ाई छेड़ी थी.

उन्होंने सूदखोर महाजनों के खिलाफ भी जंग का ऐलान किया. ये महाजन, जिन्हें वे दिकू कहते थे, कर्ज के बदले उनकी जमीन पर कब्जा कर लेते थे. यह मात्र विद्रोह नहीं था, बल्कि यह आदिवासी अस्मिता, स्वायतत्ता और संस्कृति को बचाने के लिए महासंग्राम था.   उन्होंने कहा कि अमर शहीद बिरसा मुंडा के दिखाये रास्ते पर चल ही झारखंड का सर्वांगीण विकास हो सकता है, गठबंधन सरकार इस संकल्प को पूरा करने के लिए तत्पर है.

Share this:

  • Click to share on Facebook (Opens in new window)
  • Click to share on X (Opens in new window)

Like this:

Like Loading...

Related

Previous Post

भगवान बिरसा मुंडा जयंती पर कांग्रेस नेताओं ने समाधि स्थल पर किया माल्यार्पण

Next Post

15 नवंबर: आज के दिन ही सचिन ने किया था डेब्यू, इसी दिन खेला अपने कैरियर की आखिरी पारी

Next Post
15 नवंबर: आज के दिन ही सचिन ने किया था डेब्यू, इसी दिन खेला अपने कैरियर की आखिरी पारी

15 नवंबर: आज के दिन ही सचिन ने किया था डेब्यू, इसी दिन खेला अपने कैरियर की आखिरी पारी

  • Privacy Policy
  • Admin
  • Advertise with Us
  • Contact Us

© 2025 BNNBHARAT

No Result
View All Result
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य

© 2025 BNNBHARAT

%d