रांची: आज दिनांक 30-10-2019 को हरमू स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में पार्टी के वरीय नेता अरुण उरांव ने कहा कि बाबा कार्तिक उरांव की जयंती मनाना कांग्रेस की ढ़कोसलाबाजी है, क्योंकि कांग्रेस न ही बाबा कार्तिक उरांव के विचारों का कभी सम्मान कर पायी न ही उनके आदिवासीहितों के लिए उठाए गए कदमों का समर्थन किया.
उन्होंने कहा कि कांग्रेस की रैली में आज किसी भी कांग्रेसी नेता ने बाबा कार्तिक उरांव के विचारों एवं उनके सपनों पर बात नहीं की. उन्होंने बताया कि कांग्रेस के इसी वोटबैंक की राजनीति का परिणाम है कि 2 हजार की क्षमता वाले विधानसभा मैदान में रैली करने के बावजूद उनका समारोह स्थल खाली रहा इससे उनके विलुप्त होते जनाधार का पता चलता है.
उन्होंने कहा कि जब बाबा कार्तिक उरांव ने धर्मान्तरण करके ईसाई बने आदिवासियों के आरक्षण को निरस्त करने के लिए अपना स्वर संसद तक बुलंद किया था, तब कांग्रेस ने संसद में उनका सहयोग भी करना उचित नहीं समझा.
उरांव ने कहा कि बाबा कार्तिक उरांव ने एक सर्वेक्षण का हवाला देकर 1980-81 में बताया था कि आरक्षण का लाभ धर्मांतरित आदिवासियों ने सबसे अधिक उठाया था. आरक्षण का वास्तविक लाभ जिन्हें मिलना चाहिए था, उन्हें नहीं मिला. बाबा कार्तिक उरांव ने सांसद बनने के बाद धर्मान्तरण का मामला उठाया था और कहा था कि धर्म परिवर्तन के बाद आदिवासी का लाभ नहीं मिलना चाहिए.
बाबा कार्तिक उरांव ने इस मामले में पर्सनल विधेयक भी लाया था, लेकिन वे इस अभियान में सफल नहीं हो सके. उन्होंने आगे कहा कि बाबा कार्तिक उरांव के ही यह विचार थे कि आदिम जनजाति और अनुसूचित जनजातियों ने हजारों वर्षों से तमाम विदेशी हमलों के बावजूद अपनी सांस्कृतिक विरासत बरकरार रखी है. आदिवासी की संस्कृति और परंपरा को छोड़कर दूसरे धर्म को अपनाने वाले लोगों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए. इससे मूल आदिवासी धर्म का पालन करने वाले आदिवासी वंचित हो जाते हैं.
कांग्रेस की सुपरफ्लॉप रैली का हवाला देते हुए हुए अरुण उरांव ने कहा कि आज हर समाज, हर वर्ग कांग्रेस से कन्नी काट रहा है. उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को, कांग्रेस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह हमेशा ही आदिवासी हितों की बात करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ क्यूं खड़ी हो जाती है, चाहे वह उनकी पार्टी का ही सम्मानित नेता क्यूं न हो.
उन्होंने कहा कि छोटानागपुर का काला हीरा और आदिवासियों के मसीहा माने जाने वाले बाबा कार्तिक उरांव से कांग्रेस को इतनी नाराजगी क्यूं थी. कांग्रेस को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि जिन प्रयासों से आदिवासिहित की रक्षा होती है, कांग्रेस उसके विरोध में क्यूं खड़ी हो जाती है, चाहे वह धर्मान्तरण बिल हो अथवा धारा 370.

