चतरा:शनिवार को मातृभाषा हिंदी दिवस के अवसर पर स्थानीय चतरा महाविद्यालय चतरा के बीएड विभाग में हिंदी दिवस समारोह का आयोजन किया गया. समारोह का विधिवत शुभारम्भ द्वीप प्रज्वलन कर किया गया गया. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रभारी प्राचार्य डॉ रामानंद पाण्डेय ने हिंदी की विशेषताओं को बताते हुए कहा कि हिंदी हमारी पहचान है. उन्होंने हिंदी को अपनी व्यक्तित्व की पहचान बताया. उन्होंने भारत की गुलामी का कारण भाषा में विभिन्नता को बताया.उन्होंने बताया कि आज हमें एक समृद्ध भाषा की जरूरत है और वह भाषा है हिंदी. रामानन्द पांडेय ने बताया कि विश्व की समृद्ध साहित्य हमारे भारत की साहित्य है. भाषा विज्ञान की दृष्टि से इन्होंने सबसे समृद्ध हिंदी को बताया. हिंदी में जो लिखते हैं वही समझते हैं लेकिन अन्य भाषा में लिखते हैं समझते हैं कुछ और बोलते हैं कुछ. महिला महाविद्यालय चतरा के प्राचार्य डॉ आरपी रहे ने हिंदी की आज की स्थिति को काफी दयनीय बताया. हिंदी और संस्कृत को भाई-बहन जैसा कहा.
भारत को जब विश्व गुरु कहा जाता था तब हिंदी में हमारी भाषा थी. उन्होंने बताया कि अंग्रेजों ने हिंदी को दबाने की कोशिश की और अपनी भाषा अंग्रेजी को प्रभावशाली बनाया और आज भी हम अंग्रेजी की मानसिकता से बाहर नहीं आ पाए हैं अंत में उन्होंने कहा कि हिंदी है हम हिंदुस्तान हमारा है. बीएड विभागाध्यक्ष डॉ नंदकिशोर सिंह हिंदी दिवस की शुभकामना देते हुए उन्होंने बताया कि हिंदी भाषा उस समुद्र की तरह है जिसमें अन्य भाषा नदियों के समान जाके समा जाती है उन्होंने बताया कि आज हम अंग्रेजों का गुलाम बन चुके और हिंदी को भूलते जा रहे हैं उन्होंने बच्चों से आग्रह किया कि हिंदी को अपना गौरव बनाएं और हिंदी को अपनाएं उन्होंने अंग्रेजी पर तंज कसते हुए कहा कि जो सम्मान भाषा में मिलेगा वह सम्मान अंग्रेजी में कभी नहीं मिल पाएगा.
सहायक प्रोफेसर श्री चंदन कुमार सिंह ने कहा कि मातृभाषा से जुड़ा हिंदी का अस्तित्व मात्र का रहा गया है पर हिंदी के विषय में एक उदाहरण देते हुए कहा कि आज हिंदी भाषा का अस्तित्व एक बिंदी के जैसे रह गया है लेकिन एक विवाहित महिला से जाकर पूछिए कि उस बिंदी का क्या महत्व होता है वह महत्व हमारे लिए हिंदी का है. हिंदी को अपने दिनचर्या में समाहित करना चाहिए आज अन्य देश अपनी भाषा में सारे कामकाज करते हैं और इसी से वे समृद्ध होते हैं. लेकिन भारत में हिंदी की स्थिति दयनीय है इसे हम सुधार कर हर एक कार्य को हिंदी भाषा में करना चाहिए. कार्यक्रम में मुख्य रूप से प्रोफेसर ऋषिकेश कुमार, मुमताज अंसारी, संतोष कुमार, ग्लोरिया ग्रेस, शोभा कुजूर सहित सभी बीएड प्रशिक्षु उपस्थित थे.

