रांची: राज्य के कृषि मंत्री बादल ने केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारामन द्वारा 20लाख करोड़ रुपये के पैकेज को लेकर आज की गयी घोषणा पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते कहा है कि केंद्र सरकार की घोषणाएं मौद्रिक है, इसे राजकोषीय मदद नहीं कहा जा सकता.
कृषि मंत्री ने कहा कि इतनी बड़ी विपदा में भी केंद्र सरकार खजाना से गरीब और जरूरमंदों तक मदद पहुंचाने में राशि निकालने में संकोच कर रही है.
उन्होंने कहा कि वित्तमंत्री की ओर से जो घोषणा की गयी है, ये सभी व्यवसायिक बैंकों, नाबार्ड या ग्रामीण बैंक अथवा को-ऑपरेटिव बैंक के माध्यम से ऋण की व्यवस्था की गयी है. इसमें सहयोग नहीं है, इसे विपदा में सहायता नहीं माना जा सकता.
ऋण भुगतान में कुछ महीनों की छूट जरूर दी गयी है, लेकिन इसका भुगतान करना होगा. उन्होंने कहा कि मनरेगा के दस हजार करोड़ रुपये और खाद्य सुरक्षा के 3500 करोड़ रुपये ही सरकार के खजाने से निकलेंगे.
उन्होंने कहा कि किसानों को वही पैसा मिल रहा है, जो बजट में प्रावधानित है. प्रधानमंत्री किसान योजना में जो बिना कोरोना संकट के भी मिल रहा था. लेकिन फसल की कीमत न गिरे, इसके लिए कोई उपाय नहीं किया गया है, फसलों के दाम गिरे, तो किसानों की तबाही आ जाएगी, सरकार की घोषणा में किसानों के हाथ कुछ नहीं लगा.
उन्होंने कहा कि सरकार ने ऋण मंजूरी को ही रिलीफ मान लिया है, किसानों के फसलों की कीमत न गिरे, जो उनकी आर्थिक सुदृढ़ता के लिए जरूरी था, कोई उपाय नहीं किया गया है.
वहीं कृषि से जुड़े ग्रामीण फूड प्रोसेसिंग यूनिट के लिए उम्मीद थी कि कुछ राहत, प्रोत्साहन आएगा, लेकिन इसको भी पैकेज में कहीं जगह नहीं मिली.
कृषि मंत्री बादल ने राज्य सरकार द्वारा किये जा रहे कार्यां के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि मनरेगा योजना अंतर्गत वृक्षारोपण कार्यक्रम में जिला वार वृक्षों की उत्पादकता एवं उपयोगिता के आधार पर वृक्ष लगाने की बातें कही है.
इसे लेकर निदेशक झारखंड राज्य बागवानी मिशन को एक रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि राज्य के 24 जिला में जिला वार वहां की मिट्टी और मॉनसून के हिसाब से कौन से फलदार वृक्ष लगाए जाएं इसकी जानकारी दें .
विभागीय मंत्री के निर्देश के बाद विभागीय पदाधिकारियों ने जिला वार कौन से वृक्ष उस जिले में लगाए जाएं उसकी सूची दी है, विभागीय मंत्री ने उस सूची को ग्रामीण विकास सचिव को भेज दिया है और उनसे कहा है कि वे प्राथमिकता के आधार पर यदि जिला वार फलों के वृक्षों की जो सूची है, उसके अनुसार फलदार वृक्ष जिले में लगाने का काम करें तो हम बेहतर काम कर सकते हैं.

