रांची: आर्थिक मामलों के जानकार सूर्यकांत शुक्ला ने कहा है कि कोरोना संक्रमण के दौर में नौकरी, व्यापार और इनकम को लेकर न सिर्फ आमजन मुश्किलों से घिर गया है, बल्कि सरकारें भी राजस्व संग्रहण में आयी गिरावट से जूझ रही है. सरकारों के राजस्व संग्रहण में आयी कमजोरी के कारण जीएसटी मुआवजा के भुगतान को लेकर केंद्र और राज्यों के बीच एक तकरार जैसी स्थिति निर्मित हो गयी है. राज्यों को जीएसटी मुआवजा के संबंध में 27 अगस्त को जीएसटी परिषद की बैठक बुलायी गयी, बैठक में केंद्रीय वित्तमंत्री ने मुआवजा के भुगतान के लिए दो विकल्प पर विचार का प्रस्ताव दिया गया और इस पर सात कार्यदिवस के अंदर लिये गये निर्णय से अवगत कराने के लिए राज्यों को कहा. विकल्प एक में जीएसटी अपनाने के कारण 97 हजार करोड़ रुपये के संभावित नुकसान का आकलन है, जिसे राज्यों को आरबीआई से कर्ज लेना है, जिसका मूलधन और इस पर ब्याज का भुगतान सेस फंड से किया जाएगा. राज्यों को कुछ भी वहन नहीं करना है.
विकप दो में समग्र नुकसान यानि जीएसटी और कोविड-19 के कारण होने वाले संभावित नुकसान का आकलन किया गया है. यह राशि 2.35लाख करोड़ रुपये का है. इस राशि को राज्यों को बाजार से उधारी लेनी होगी और इसके मूलधन का भुगतान तो सेस फंड से किये जाने की बात है, परंतु इस पर पड़ने वाले ब्याज का बोझ राज्यों को वहन करना पड़ेगा.
सूर्यकांत शुक्ला ने कहा कि 1 सितंबर को राज्यों के वित्त सचिव और केंद्र के वित्त सचिव बात कर मामले की गुत्थियों को समझ कर समाधान की दिशा में आगे बढ़ना है. सचिव स्तर पर हुई बातचीत से जो बात सामने आयी है, उसमें राज्यों ने नुकसान के आकलन का आधार और अपने-अपने राज्यों के नुकसान की राशि को जानना चाहा है. राज्यों का मानना है कि वे अपनी ही पावती राशि के लिए कर्ज का बोझ क्यों लें. कोरोना की लड़ाई से राज्यों ने अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर परिस्थितियों का सामना किया है और लड़ाई जारी है.
जीएसटी अपनाने के साथ राज्यों ने 87 प्रतिशत कराधान का अपना अधिकार केंद्र को समर्पित कर दिया है. राज्यों को जीएसटी मुआवजा का भुगतान जून 2022 तक करने की जिम्मेवारी केंद्र सरकार की है, न सिर्फ नैतिक अपितु वैधानिक भी. यह सही है कि केंद्र का राजस्व भी घटा है, परंतु संसाधन जुटाने के लिए विनिवेश ,आरबीआई लाभांश और विदेशी फंडिंग जैसे फंडिंग जैसे अतिरिक्त उपाय भी केंद्र के पास हैं, जो राज्यों के पास नहीं हैं.
नेशनल इंस्टीट्यूट पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी के पूर्व सीईओ रोथिन रॉय का मानना है कि राज्यों को जीएसटी मुआवजा का पूरा हिस्सा बिना किसी शर्त और दायित्वों के मिलना चाहिए.
झारखंड के मुख्यमंत्री ने भी केंद्र के विकल्पों को उलझाने वाला बताया है. इसके पहले केरल, पंजाब, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, पुड्डुचेरी और दिल्ली जैसे राज्यों ने केंद्र के विकल्पों पर असहमति जता दी है.
सूर्यकांत शुक्ला ने कहा कि सभी राज्य जीएसटी व्यवस्था में इसलिए शामिल हुए थे कि उन्हें आश्वासन दिया गया था कि जीएसटी के कारण कोई नुकसान होगा, तो केंद्र उसकी भरपाई करेगा. इसलिए ये पूरी जिम्मेवारी केंद्र की है कि वह राज्यों को बिना शर्त लगाये मुआवजा का भुगतान करें.

