नई दिल्ली : केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार हाल में हुए चीन के साइबर हमलों के मद्देनजर टेलीकॉम सेक्टर में हुवावे और जेडटीई जैसी चाइनीज कंपनियों के बढ़ते दबदबे को रोकने की तैयारी कर रही है. भारत की मौजूदा 4G और आने वाली 5G टेक्नोलॉजी के प्रसार के लिए केंद्र सरकार ने अपने लाइसेंस रूल्स में बदलाव किया है. ये भी सुनिश्चित किया गया है कि 15 जून 2021 के बाद इन सेक्टर में इस्ते माल होने वाले उपकरण संबंधित अथॉरिटी की मंजूरी के बाद और भरोसेमंद कंपनियों से ही खरीदे जाएं.
केंद्र सरकार ने यह कदम हाल में चीन की ओर से भारत के क्रिटिकल साइबर या टेलीकॉम एरिया में किए गए साइबर अटैक के बाद उठाया है. एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि भारत के बढ़ते हुए टेलीकॉम सेक्टर को सुरक्षित करने के लिए ये बदलाव किया गया है. इससे असुरक्षित और अवांछित वेंडर्स को इस सेक्टर से दूर रखा जा सकेगा. सरकार उन टेलीकॉम कंपनियों से नाखुश है, जिन्होंने पिछले साल से चले आ रहे तनाव और टेलीकॉम डिपार्टमेंट के स्पष्ट संकेत के बाद भी चीन से टेलीकॉम इक्विपमेंट पर निर्भरता दिखाई. टेलीकॉम डिपार्टमेंट ने बुधवार को संशोधन जारी करते हुए कहा कि 15 जून 2021 से टेलीकॉम कंपनियां केवल भरोसेमंद साझेदारों और संबंधित विभाग की मंजूरी के बाद ही अपने नेटवर्क को अपग्रेड करने के लिए उपकरण इस्ते माल कर सकेंगे.
नेशनल सिक्योरिटी डायरेक्टिव फॉर टेलीकॉम पर दिसंबर 2020 में हुई कैबिनेट कमेटी की बैठक के बाद केंद्र सरकार ने चीनी उपकरणों से बढ़ते खतरे के बाद ट्रस्टेड सोर्सेज की लिस्ट जारी की थी. इसके तहत नेशनल साइबर सिक्योरिटी को-ऑर्डिनेटर डेसिग्नेटेड अथॉरिटी के तौर पर काम करेंगे. वे असुरक्षित सोर्सेज के साथ होने वाले आयात पर नजर रखेंगे. इस नोटिफिकेशन के तहत सरकार अथॉरिटी के जरिये टेलीकॉम इक्विपमेंट की खरीद पर राष्ट्रीय रक्षा और साइबर सिक्योरिटी को ध्यान में रखते हुए अपनी शर्त के अनुसार बदलाव करने को कह सकती है. ये बदलाव पहले के समझौतों पर लागू नहीं होंगे. यह कदम चीनी कंपनियों को 4G के प्रसार और आने वाले दिनों में टेलीकॉम सेक्टर की ओर से की गई करीब 78,000 करोड़ रुपये की स्पेक्ट्रम बिक्री से दूर रखेंगे.

