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केंद्र सरकार खुद ऋण लेने से डर रही, बेरोजगार-प्रवासी श्रमिकों को कर्ज लेने का दिखाया जा रहा है रास्ता: रामेश्वर उरांव

by bnnbharat.com
May 17, 2020
in समाचार
केंद्र सरकार खुद ऋण लेने से डर रही, बेरोजगार-प्रवासी श्रमिकों को कर्ज लेने का दिखाया जा रहा है रास्ता: रामेश्वर उरांव
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रांची: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सह राज्य के वित्त एवं खाद्य आपूर्ति मंत्री डॉ. रामेश्वर उरांव ने कहा है कि कोरोना महामारी में भी केंद्र सरकार स्वयं तो कर्ज लेने से डर रही है और राजकोषीय घाटे को बढ़ने नहीं देना चाह रही है. लेकिन रिलीफ के नाम पर प्रत्यक्ष तौर पर कोई सहायता उपलब्ध कराने की जगह प्रवासी श्रमिकों, बेरोजगारों हुए लोगों और प्रभावितों को कर्ज लेने का ही रास्ता दिखा रही है.

डॉ. उरांव ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी से प्रभावित विभिन्न समूहों को जिन्होंने अपनी आमदनी का जरिया खोया है, जिनकी आय घट गयी है, उन्हें निश्चित सुरक्षा को तत्काल काम करें, यह प्रोत्साहन पैकेज में नहीं दिखती है.

उन्होंने कहा कि घोषणाएं सुनकर शेयर बाजार ने भी अपनी प्रतिक्रिया दे दी है, यह बाजार को भी अच्छा नहीं लगा. कोविड-19 से देश की अर्थव्यवस्था में जो अफरा-तफरी मची है, अराजक स्थितियां है,उसे प्रधानमंत्री के इस पैकेज से भरपाई नहीं किया जा सकता.

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि देश में ज्यादातर मजदूर संगठित क्षेत्र का हिस्सा है, जिन्हें सामाजिक सुरक्षा का पूरा कवर नहीं मिला हुआ है, ऐसे में इन मजदूरों को पहले दो-तीन महीने के खर्च के लिए इनकप सपोर्ट चाहिए था, जो केंद्र सरकार द्वारा घोषित पैकेज में नहीं है.

उन्होंने कहा कि कर्ज देने के लिए बैंकों के पास धन की कमी नहीं है, वे अभी रोज 6 से 8 लाख करोड़ रुपये प्रतिदिन आरबीआई में जमा करते है, य़द्यपि उन्हें बहुत कम ब्याज 3.75 प्रतिशत ही मिलता है. बैंक रिस्क लेने से डरते है और बैंकों के डर को दूर करने की योजना नीतिगत फैसला पैकेज की घोषणाओं में नहीं है.

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि आरबीआई ने मौद्रिक नीतियों के तहत तरलता बढ़ाने के जो उपाय पहले ही घोषित किये गये थे, उन योजनाओं के आकार को भी प्रधानमंत्री ने अपनी घोषणाओं में शामिल करके अपने पैकेज को बड़ा दिखाने का बाजीगरी वाला काम किया है.

फूड सिक्योरिटी और प्रधानमंत्री किसान सम्मान राशि के पैसे पहले से ही बजट में प्रावधानित है, उसे भी 12 मई को घोषित नई राहत पैकेज में शामिल कर अपनी चतुराई का प्रदर्शन किया गया है.

इसी तरह से माइक्रो, मीडियम और स्मॉल इंटरप्राईजेज को 3 लाख रुपये का बिना गारंटी के लोन देने की योजना की घोषणा की गयी है. यह सुविधा मात्र 45लाख यूनिट को मिलेगा, जबकि देश में 6 करोड़ एमएसएमई यूनिट है, अर्थात 7 प्रतिशत एमएसएमई को ही बिना गारंटी की सुविधा वाला लोन मिलेगा.

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