किसान तबाह हो जाएंगे, बेरोजगारी बढ़ेगी
रांची: अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव और पार्टी के झारखंड मामलों के प्रभारी आरपीएन सिंह ने कहा है कि भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र की एनडीए सरकार अपने पूंजीपति मित्रों को फायदा पहुंचाने के लिए देशभर की कृषि मंडियों को समाप्त करना चाहती है और कृषि उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी को समाप्त कर किसानों को मिलने वाले एक लाख करोड़ रुपये को बचाना चाहती है, इससे किसान तबाह हो जाएंगे और बेरोजगारी बढ़ेगी.
कांग्रेस प्रभारी ने गुरुवार को नयी दिल्ली से वर्चुअल प्रेस कांफ्रेंस मेंकहा कि केंद्र सरकार की ओर से कृषि से संबंधित जिन तीन बिल को संसदीय परंपरा को दरकिनार कर संसद से जबरन पारित कराया गया है.
इस काले कानून से देश की 40 लाख मंडियां समाप्त हो जाएगी, इससे गरीब किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ेगा, क्योंकि देश में 86 प्रतिशत किसान पांच एकड़ से कम भूमि पर और 60 प्रतिशत किसान 2 एकड़ से कम भूमि पर कृषि कार्य करते है.
ऐसे में नये कानून में एमएसपी की अनिवार्यता को खत्म कर देने से वे कॉरपोरेट घराने के समक्ष घुटने टेकने को मजबूर हो जाएंगे. उन्होंने बताया कि भाजपा ने शांता कुमार कमेटी की उस सिफारिश को लागू करना चाहती है, जिसमें बताया गया है कि एमएसपी खत्म करने से एक लाख करोड़ रुपये की बचत केंद्र सरकार को हो सकती है, भाजपा नेतृत्व वाली सरकार इसी एजेंडा पर काम कर रही है.
आरपीएन सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री भले ही बार-बार मौखिक रूप से यह कह रहे है कि एमएसपी खत्म नहीं होगा, लेकिन केंद्र सरकार इस बात का प्रावधान कानून में क्यों नहीं कर रही है, इसी बात से उनकी मंशा साफ हो सकती है. उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी ने तो पहले भी कहा था कि सभी को 15लाख रुपये मिलेगा, साल में दो करोड़ युवाओं को नौकरी मिलेगी, लेकिन यह सिर्फ जुमला ही साबित हुआ.
आरपीएन सिंह ने कहा कि भाजपा द्वारा यह भी भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है कि कांग्रेस पार्टी ने भी इसी तरह का कदम उठाना का फैसला लिया था, यह पूरी तरह से बेबुनियाद है, कांग्रेस पार्टी ने सिर्फ दूर-दराज के किसानों की समस्याओं की दिशा में आवश्यक पहल का भरोसा दिलाया गया था.
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के इस फैसले के खिलाफ पार्टी ने नवंबर तक देशव्यापी अभियान चलाने का निर्णय लिया है. इसके तहत 26 सितंबर स्पीफ अप फॉर फॉमर्स के तहत पार्टी के सभी नेता-कार्यकर्त्ता सोशल मीडिया के माध्यम से किसानों की आवाज उठाएंगे.
वहीं 28 मार्च को राज्य मुख्यालयों में गांधीजी की प्रतिमा के समक्ष धरना के बाद राजभवन मार्च किया जाएगा और राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा जाएगा.
2 अक्टूबर को गांधी व शास्त्री जी की जयंती के मौके पर पार्टी के वरिष्ठ नेता जिलों में जाकर विरोध सम्मेलन में हिस्सा लेंगे, वहीं 10 अक्टूबर को राज्य मुख्यालयों में प्रदर्शन होगा. इसके अलावा 2 से 30अक्टूबर तक देशव्यापी हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा.

