नई दिल्ली: केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि प्रस्तावित सेंट्रल विस्टा री-डेवल्पमेंट योजना जो 51 मंत्रियों के 10 भवनों को एक साथ करने की है, इसे एक करने से विभाग हर वर्ष करीब 1000 करोड़ रुपये के अत्यधिक खर्च को बचा सकेगा.
केंद्रीय लोक निर्माण विभाग द्वारा पेश किए गए एक हलफनामे के अनुसार, जो केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय से जुड़ा हुआ है, ने बताया है कि कार्यालय स्थान में लगभग 0.38 मिलियन वर्ग मीटर की कमी है और जिसकी वजह से सरकार प्रत्येक वर्ष कार्यालय किराए के रूप में लगभग 1,000 करोड़ रुपये खर्च करती है.
शीर्ष अदालत राजीव सूरी और लेफ्टिनेंट कर्नल (सेवानिवृत्त) अनुज श्रीवास्तव द्वारा सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के खिलाफ दायर दो जनहित याचिकाओं (PIL) की सुनवाई कर रही थी. इस याचिका में सेंट्रल विस्टा कमेटी (सीवीसी) द्वारा अनापत्ति प्रमाण पत्र (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) देने और एक नए संसद भवन के निर्माण के लिए पर्यावरणीय मंजूरी को लेकर सवाल उठाए हैं.

