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बीएनएन भारत की दिल्ली पब्लिक स्कूल के प्राचार्य डॉ. राम सिंह से खास बातचीत
रांची: दिल्ली पब्लिक स्कूल के प्राचार्य डॉ राम सिंह ने कहा कि कोरोना प्राकृतिक आपदा है. इस तरह से एक अदृश्य जीव आकर पूरे विश्व को विचलित कर देगा और पुरानी तरफ लौटने के लिए मजबूर करेगा, यह हमें पता नहीं था. अचानक इसकी जानकारी मिली और लॉकडाउन घोषित कर दिया गया. स्कूलों पर भी चुनौती आई कि बच्चों की कैसे टीचिंग करें.
आपदा का सुखद पहलू यह है कि इससे ऑनलाइन टीचिंग निकल कर सामने आया. यह बहुत ही अच्छा माध्यम है. कई बार ऐसी आपदाएं आती है. जाम होता है. बंद होते हैं, तब हम बच्चों से संपर्क कर सकते हैं. बच्चों को ऐसे माध्यम से पढ़ा सकते हैं.
प्राचार्य ने कहा कि इस आपदा के दोनों पहलू हैं. कुछ तो बड़ा दुखद है. जो लोग सावधानी नहीं बरत रहे हैं, उनकी जान भी जा रही है. पूरा विश्व चिंतित है. पूरी दुनिया इसके लिए काम कर रही है. इस परेशानी से कुछ अच्छा भी निकल कर सामने आया है. हमें जरूरत है कि उन अच्छी चीजों की तरफ अपना ध्यान करें. इसी तरह हम पॉजिटिव बने रहेंगे.
ऑनलाइन टीचिंग का बदलाव विदेशों में पहले ही आ चुका था. ऑनलाइन टीचिंग और वाईफाई का यूज हो रहे थे. भारत में इसका स्लो प्रोसेस था. हमारी जनसंख्या बहुत बढ़ रही है. इतने बड़े-बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और बिल्डिंग बन रहे हैं. जमीन कम हो रही है. बच्चों को पढ़ाने के लिए इसपर अधिक खर्च होता है. अब शायद ऑनलाइन टीचिंग द्वारा इस तरह के खर्च कम हो जाएंगे.
ऑनलाइन सिस्टम इतनी जल्दी अडॉप्ट कर पाएंगे, हमें शायद पता नहीं था. अपने टीचर की काबिलियत पर शक था. कुछ अभिभावक जो बाहर गए हैं, वे और उनके बच्चे भी तारीफ कर रहे हैं कि भारतीय शिक्षकों ने बहुत जल्द यह सिस्टम अडॉप्ट किया. प्रभावी तरीके से पढ़ा रहे हैं.
वर्चुअल लाइव दिखाकर बच्चों को पढ़ा रहे हैं. बहुत सुखद है. प्रोसेस जब शुरू होता है, तब कई तरह की चीजें निकलकर आती है. हर तरह की परेशानी को सॉल्व करके आगे बढ़ रहे हैं. शुरू में लगता था कि यह नहीं हो पाएगा. शुरुआती दौर में यह सोचा गया था कि एक-दो हफ्ते इंगेजमेंट रहेगा. कुछ बच्चे पढ़ना शुरू करेंगे. इतने परफेक्शन की उम्मीद नहीं थी, लेकिन समय के साथ बच्चों का फीडबैक आया. बच्चे भी तैयार नहीं थे. अभिभावक भी तैयार नहीं थे.
डॉ सिंह ने कहा कि हम तो बच्चों को मोबाइल के लिए मना करते थे. आज स्थिति ऐसी हो गई है कि हम बच्चों को बोल रहे हैं कि मोबाइल के साथ बैठो. उसका गूगल खोजो. वहां हम लोग मटेरियल भेज रहे हैं. जो चीजें नहीं हो रही थी, वह हमें करना था. कुछ कठिनाई थी, लेकिन समय के साथ टीचर को भी फीडबैक दिया गया.
अभिभावक को भी बोला गया कि बच्चों को किस टाइम और कैसे करें. सिस्टम नया था. इसके शुरू होने पर तरह-तरह की परेशानी आती है. कई सुझाव आए. उन सभी को स्वीकार करके उनके अनुभव से नया मॉडल निकल कर आ रहा है. यह अच्छा है. यह उम्मीद से भी अच्छा है.
प्राचार्य ने कहा कि शिक्षा मंत्री ही नहीं पूरे देश के लोग यह अपील कर रहे हैं कि समाज को कैसे सहूलियत दी जाए. स्कूल भी आगे आकर कुछ अपने प्रोसीजर में फीस डिपॉजिट में कुछ अपने चेंजेज किए हैं. सबका सुझाव है. स्कूलों का अपना भी खर्च होता है. उसको भी देखा जाएगा. हम लोग देखेंगे और बैठेंगे.
लॉकडाउन खत्म होने के बाद उसे सॉल्व कर लेंगे. यह बहुत बड़ा प्रॉब्लम नहीं है. स्कूल के शिक्षक और कर्मचारी हैं. उनकी भी सैलरी हमें देनी है. जो भी सैलरी दी जाती है. वह मिलने वाले फीस से ही दी जाती है. अब यह कैसे होगा, इस पर चर्चा की जाएगी. शिक्षा मंत्री का सुझाव फीस नहीं लेने का है. इसपर हम लोग देखते हैं, क्या कर सकते हैं.
प्रचार्य ने कहा कि नए सत्र के एडमिशन के लिए ऑनलाइन टेस्ट कर रहे हैं. हमें लगता है कि अब स्कूलों में थोड़े बहुत बदलाव आएंगे. इतना जल्दी कोरोना वायरस खत्म. नहीं हो रहा है. ऐसा सुनने में आ रहा है कि स्कूल खोलने में दो-तीन महीने का टाइम लग सकता है. इस दो-तीन महीने भी अगर स्कूल खुलता है तो हजारों बच्चों को एक साथ स्कूल में नहीं बुला सकते हैं. स्कूल की भी स्थिति बदलेगी.
संभव है कि बच्चों को शिफ्ट के आधार पर बुलाया जाए. हो सकता है कि क्लास वाइज बच्चों को बुलाया जाए. ऑनलाइन टीचिंग हमेशा होती रहेगी. जिस दिन बच्चों को नहीं बुला रहे हैं, उस दिन बच्चों को ऑनलाइन पढ़ा दें. दो दिन बच्चों को ऑनलाइन पढ़ा दें और दो दिन बच्चों को स्कूल बुला लें.
प्रैक्टिकल के लिए स्कूल बुला ले. सिलेबस को कम करने की बात हो रही है. यह भी बात हो रही है कि जो हम बच्चों को ऑनलाइन पढ़ा रहे हैं, उसका रिवीजन भी कर दें. इस पूरी प्रक्रिया में शिक्षा पद्धति में बदलाव दिख रहा है. बदलाव आ रहा है. सबसे अपील है कि इस बदलाव को हमें खुले दिल से लेना चाहिए.

