नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बीते सोमवार को देश का आम बजट पेश किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2021-22 के आम बजट को देश के सामने खड़ी चुनौतियों के समाधान को नई तेजी देने वाला बताया. बजट पेश हुए तीन दिन हो गए हैं लेकिन कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी लगातार इस बजट को लेकर मोदी सरकार पर हमलावर हैं. इस बार उन्होंने कहा कि भारत के सबसे बड़े कार्यबल के नियोक्ताओं ने देश के लोगों के साथ विश्वासघात किया है.
सरकार के आम बजट को लेकर मोदी की क्रोनी को समझाते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट कर लिखा, ‘मोदी क क्रोनी केंद्रित बजट का मतलब है- संघर्षरत एमएसएमई ने कोई कम ब्याज ऋण नहीं दिया, कोई जीएसटी राहत नहीं दी. भारत के सबसे बड़े कार्यबल के नियोक्ताओं ने विश्वासघात किया.’
इससे पहले कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कृषि कानूनों के खिलाफ बीते 70 दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर बैठे किसानों के धरना स्थल के इर्दगिर्द तारबाड़ करने, नुकीली कीलें बिछाने और सीमेंटेड दीवारें खड़ी किए जाने को लेकर एक बार फिर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. राहुल ने आरोप लगाया कि इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा को गहरा धक्का लगा है और भाजपा-आरएसएस ने देश की साख को ध्वस्त कर दिया है. कांग्रेस नेता ने तीनों नए कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग करते हुए सवाल किया कि सरकार किलेबंदी क्यों कर रही है? क्या वह किसानों से डरते है? क्या किसान दुश्मन हैं?
उन्होंने कहा कि किसान देश की ताकत है. इनको मारना, धमकाना सरकार का काम नहीं है. बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल ने कहा कि सरकार का काम बातचीत करना और समस्या का समाधान निकालना है.
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कहते हैं कि प्रस्ताव बरकरार है कि कानूनों के क्रियान्वयन को कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया जाए. मेरा मानना है कि इस समस्या का समाधान जल्द करना जरूरी है. किसान पीछे नहीं हटेंगे. अंत में सरकार को पीछे हटना होगा. इसी में सबका भला है कि सरकार आज ही पीछे हट जाए और तीनों कृषि कानूनों को वापस ले.

