मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखण्ड की पहचान और संस्कृति के मूल में प्रकृति की पूजा है. हमारे आदिवासी भाई-बहन प्रकृति के संरक्षक रहे हैं.
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज लोकगीतों पर ढोल-मांदर की थाप ऐसी पड़े की पूरा परिवेश झूम उठे. हर भाई अपनी बहनों को तीन करम के डाल दे जिसे बहन भगवान के, समाज के और परिवार के नाम से रोपेंगी.
इससे हमारे जीवन में प्रकृति और हरियाली के महत्व के साथ समस्त सृष्टि के प्रति कृतज्ञता बोध है. मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें मिलकर झारखण्ड को और हरा भरा बनाना है.

