रांची: ईसाई धर्मावलंबियों के सबसे बड़े त्योहार क्रिसमस को लेकर राज्यभर में उल्लास और उमंग का माहौल है. 2020 वर्ष पूर्व आज ही के रात ईसा मसीह का जन्म हुआ था. उसी की याद में आज रात दुनिया भर के ईसाई समुदाय के लोग येशु के जन्म का उत्सव मनाते हैं. इसे ही क्रिसमस कहते हैं, कुछ लोग इसे बड़ा दिन के रूप से भी मनाते हैं.
मगर कोविड-19 के कारण इस वर्ष क्रिसमस कुछ अलग तरीके से मनाने का निर्णय लिया गया है. रांची ईसाई धर्म प्रांत के विशप फेलिक्स टोप्पो एवं थेयोडोर मसकारेन्हास क्रिसमस का संदेश देते हुए लोगों से अपील की है कि इस वर्ष का क्रिसमस गरीबों और जरूरतमंदों की सेवा कर मनाना है.
इधर, राज्यभर में क्रिसमस पर्व की तैयारियां अपने अंतिम चरण में है. इसाई बहुल क्षेत्रों में उत्साह और उमंग चरम पर है. लोग क्रिसमस पर्व को यादगार बनाने में जुटे हुए हैं. इसके लिए व्यापक तैयारियां की जा रही है. बाजार में चहल-पहल बढ़ा हुआ है. स्थानीय कैथोलिक चर्च का प्रार्थना सभा सज कर तैयार है. चरनी को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है.
हालांकि, इस बार वैश्विक महामारी कोरोना के कारण गैदरिग का आयोजन नहीं हो रहा है. प्रार्थना सभा में भी बहुत अधिक भीड़ नहीं होगी. कोरोना गाइडलाइन का पूरा-पूरा पालन किया जा रहा है. फादर नोबेल कुजूर ने बताया कि क्रिसमस पर्व को लेकर उत्साह और उमंग तो है, किंतु चर्च में इस प्रकार की विशेष तैयारी नहीं की जा रही. लाइट आदि का खास डेकोरेशन नहीं किया जा रहा है. चर्च के प्रार्थना सभा को अंदर से सजाया और संवारा जा रहा है.
फादर ने कहा कि प्रभु ईशु के अवतरण का पल ऐतिहासिक होता है. फादर कहते हैं कि आज मध्य रात 12ः00 बजे प्रभू यीशु का चरनी में जन्म होगा. जैसे ही घड़ी की सूई रात के बारह बजे पहुंचेगी, वैसे चर्च में घंटी बजने लगेगी. फादर कहते हैं कि इस बार चर्च में अधिक भीड़ नहीं होगी. दरअसल वैश्विक महामारी को देखते हुए क्रिसमस का पर्व सादगी से के साथ मनाए जाने की तैयारी की गई है. चर्च में आयोजित होने वाली विशेष प्रार्थना सभा भी संक्षिप्त होगी.

