रांची: आज दिनांक 19-10-2019 को हरमू स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में प्रेसवार्ता हुई. मीडिया बंधुओं को संबोधित करते हुए रांची सांसद संजय सेठ ने कहा कि झामुमो प्रदेश में आखिर किस तरह का बदलाव करना चाहता है, एक निर्दलीय को मुख्यमंत्री बनाकर राज्य को लूटा गया, क्या यह बदलाव चाहिए झामुमो को या फिर सीएनटी/एसपीटी एक्ट का उल्लंघन करके एक ही दिन में अलग-अलग जगहों पर 16 जमीन की रजिस्ट्री तथा हरमू में गरीब आदिवासियों की जमीन कौड़ी के भाव खरीदकर आदिवासी जमीन मालिकों को और गरीब बनाना, झारखंड में ऐसा बदलाव चाहते हैं हेमंत. उन्होंने कहा कि सोरेन परिवार के लोग विधायक, सांसद बने और बेटा मुख्यमंत्री बने और फिर झारखंड के महापुरुषों को भुलाकर सोरेन परिवार अपने दादा-दादी के नाम पर सोना-सोम्ब्रम धोती, साड़ी, लूंगी योजना चलाए. क्या परिवारवाद् को बढ़ावा देने वाले इसी बदलाव की बात कर रहा है सोरेन परिवार.
उन्होंने आगे कहा कि अपने मुख्यमंत्रित्वकाल में झारखंडी भाषा को जेपीएससी से हटाया था हेमंत ने, आखिर उन्हें झारखंडी भाषा से इतनी चिढ़ क्यूं है. क्या झारखंड में झारखंडी भाषा विहीन बदलाव चाहते हैं हेमंत, उन्हें यह स्पष्ट करना चाहिए. उन्होंने कहा कि महिलाओं के हक और अधिकार के लिए झामुमो कितना गंभीर रहा है. इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि शिबू सोरेन और हेमंत सोरेन के 27 महीने के मुख्यमंत्रित्वकाल में महिला सशक्तिकरण के लिए एक भी निर्णय नहीं लिया गया, यहां तक कि बेटियों के लिए चल रही लक्ष्मी लाडली योजना को भी बंद कर दिया. उन्होंने बताया कि हमारी सरकार ने किस तरीके से महिला सशक्तिकरण के लिए काम किया, अनेक योजनाओं को धरातलीय स्वरूप दिया, यह जनता जानती है और आनेवाले विधानसभा चुनाव में 65 प्लस सीटें देकर जनता एक बार फिर डबल इंजन की सरकार राज्य में स्थापित करेगी और झामुमो जैसी परिवारवाद से ग्रस्त पार्टियों को एक बार फिर लोकसभा चुनाव की तरह नकार देगी.
मीडिया बंधुओं को संबोधित करते हुए सेठ ने कहा कि हेमंत सोरेन के मुख्यमंत्रित्वकाल में उनके सरकार के ही एक मंत्री ने उन्हें सबसे भ्रष्ट मुख्यमंत्री के खिताब से नवाजा था तो हेमंत को यह बताना चाहिए कि आखिर उनकी सरकार में ट्रांसफर पोस्टिंग का ऐसा कौन सा खेल हुआ था कि उनके सरकार के ही मंत्री ने उनपर इतने गंभीर आरोप लगाये, हेमंत सोरेन यह स्पष्ट करें कि क्या इसी भ्रष्टतंत्र को वो फिर से स्थापित करना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि किस तरीके से सारे नियमों को ताक पर रखकर हेमंत ने बालूघाटों का सौदा मुंबई के बालू माफियाओं से किया था, यह सर्वविदित है जबकि नियमानुसार बालूघाटों पर पहला अधिकार यहां की पंचायतों का होता है, क्या आदिवासी- मूलवासी के अधिकारों का दोहन हो ऐसा बदलाव चाहते हैं हेमंत? उन्होंने कहा कि हेमंत को यह स्पष्ट करना चाहिए कि अनुच्छेद 370 के हटने से जब आदिवासियों-दलितों को उनका हक मिला तो हेमंत इतने दुःखी क्यूं हुए?
प्रेसबंधुओं को संबोधित करते हुए सेठ ने कहा कि आज झामुमो ने विनोद बिहारी महतो और निर्मल महतो को भूला दिया, वे लगातार शहीदों का अपमान करते रहे हैं. यहां तक कि सभी संवैधानिक मर्यादाओं को तार-तार करते हुए झारखंड का मान बढ़ाने वाली विधानसभा का अपमान तक झामुमो ने किया, क्या प्रदेश में ऐसी व्यवस्था चाहते हैं हेमंत, उन्होंने कहा कि झामुमो ने झारखंड में हमेशा राजनीतिक अस्थिरता बनाकर झारखंड को उग्रवाद और नक्सलवाद के आग में झोंके रखा, जिससे यहां विकास का रास्ता पूणर्तः अवरुद्ध हो गया था, आमजनता महीने में 8 से 10 बार हो रहे झारखंड बंद से त्रस्त हो चुकी थी, व्यापार पूरी तरह से नक्सलियों के दयादृष्टि पर आश्रित हो चूका था. ऐसे में 2014 में बनी भाजपा की मजबूत सरकार ने इन सारी परिस्थितियों को बदलते हुए झारखंड में विकास की एक नई इबारत लिखी. भाजपा के इस सकारात्मक बदलाव से दुखी क्यों हैं हेमंत उन्हें स्पष्ट करना चाहिए.

