रांची: कोल इंडिया लिमिटेड आज देश की प्रमुख कोयला उत्पादक कंपनी है. कोयला क्षेत्र में कॉमर्शियल माइनिंग के शुरू होने के बावजूद भी देश की उर्जा आवश्यकता को पूरा करने के लिए कोल इंडिया अपनी महत्वपूर्ण भूमिका बनाये रखेगी.
कोल इंडिया के अध्यक्ष प्रमोद अग्रवाल ने विश्वास के साथ कहा कि “कॉमर्शियल कोयला खनन होने के बावजूद भी कोल इंडिया के उत्पादन या लाभ पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा.
हमारी विशिष्ट पहचान जैसे कोयले की गुणवत्ता, कुशल उत्पादन लागत प्रबंधन एवं समयबद्ध कोयला प्रेषण के चलते प्रतिस्पर्धा में आगे रहेंगे. खनन प्रक्रिया में आधुनिकतम मशीनों का इस्तेमाल और आपूर्ति में वृद्धि हमारी प्राथमिकता रहेगी.”
कंपनी के एक अधिकारी का कहना है कि कॉमर्शियल कोयला खनन से कोल इंडिया की भूमिका किसी भी प्रकार से कम नहीं होगी, बल्कि देश का कोयला उत्पादन बढ़ाने के लिए यह कदम सहायक होगा. इसलिए कॉमर्शियल माइनिंग को कोल इंडिया के प्रतिस्पर्धा के रूप में नहीं देखना चाहिए और न ही यह हमें किसी भी प्रकार से अस्थिर करेगा.
कोल इंडिया के पास वर्तमान में देश का लगभग 54% कोयला भंडार है, जो 319 बिलियन टन के करीब है. कुछ माह पूर्व इस सार्वजनिक महारत्न उपक्रम को सरकार द्वारा आवंटित 16 ब्लॉक से हमारा कुल कोयला भंडार में 9 बिलियन टन की वृद्धि हुई, जिससे यह बढ़कर 172 बिलियन टन हो गया.
इनमें से बीसीसीएल एवं डब्ल्यूसीएल दोनों को 5-5 ब्लॉक, ईसीएल को 3 ब्लॉक, जबकि सीसीएल को 2 और एमसीएल को 1 ब्लॉक मिले. इन सबमें सबसे गौर करने वाली बात यह है कि कॉमर्शियल माइनिंग ऑक्संन के लिए उपलब्ध कराये गये 41 ब्लॉक में से एक भी कोल इंडिया का ब्लॉक नहीं है.
पिछले कुछ वर्षों से आसन्न प्रतिस्पर्धा के बावजूद भी कोल इंडिया प्रति टन कोयले के उत्पादन को कम करने और कोयला आपूर्ति की बेहतर गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित कर रहा है. इस दिशा में सतत विभिन्नआ पहल की जा चुकी है. इस प्रतिस्पर्धा के वातावरण में कोयला विक्रय इन्हीं दोनों कारणों पर निर्धारित होगा.
कोल इंडिया के पास पिछले साढ़े चार दशक से अधिक कोयला क्षेत्र का विशिष्ट अनुभव कुशल मानव संसाधन, स्थापित आधारभूत संरचनाएं, सुव्यवस्थित संचालन, प्रौद्योगिकी एवं प्रेषण में निरंतर पूंजी का प्रसार, मजबूत कोयला संसाधन आधार और उपभोक्ताओं के अनुकूल उपायों के आधार पर प्राप्त लाभ हमें स्वाभाविक बढ़त प्रदान करता है.

