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जलवायु परिवर्तन की गति रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर हो सामूहिक प्रयासः आयुक्त

by bnnbharat.com
March 24, 2021
in समाचार
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मेदिनीनगर:- जलवायु परिवर्तन की गति को रोकने के लिए हम सबों को स्थानीय स्तर पर प्रयास करना होगा. रुचि लेकर छोटे-छोटे कार्य कर जलवायु परिवर्तन को रोका जा सकता है. इसके लिए हर स्तर पर लोगों को जागरूक करने का कार्य होनी चाहिए. समुदाय की सहभागिता से वनों का संरक्षण करना होगा और वन क्षेत्र में निवास कर रहे लोगों के लिए लाह, महुआ आदि से जीविकोपार्जन का संसाधन सुनिश्चित करना होगा, ताकि वनों की कटाई को रोका जा सके. वन संरक्षित/सुरक्षित होंगे. वनों को बचाने और अत्यधिक मात्रा में पेड़-पौधे लगाने और उसके संरक्षण से जलवायु परिवर्तन के खतरे की संभावनाओं से बचा जा सकेगा.यह बातें आयुक्त श्री जटाशंकर चौधरी ने कही. वे आज दुबियाखाड़ स्थित सेसा भवन में ’जलवायु परिवर्तन विषय पर प्रमंडल स्तरीय बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे. 

नाबार्ड की ओर से आयोजित इस बैठक का मुख्य उद्देश्य पलामू प्रमंडल में जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभाव, उपयुक्त अनुकूलन और शमन उपायों पर चर्चा एवं केंद्र सरकार,  यूएनएफसीसीसी के अंतर्गत विभिन्न निधियों हेतु प्रमंडल स्तरीय कार्य योजना तैयार करना है.  

आयुक्त ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के लिए मुख्य रूप से मनुष्य जिम्मेवार है. हम अपनी सुविधा के लिए जंगलों-वनों की कटाई कर नुकसान पहुंचा रहे हैं, जबकि वन जीवन का आधार है. हमें वन क्षेत्रों में फलदार, छायादार एवं अन्य किस्मों को पौधे लगाने चाहिए. साथ ही अपने खेतों में रसदार फल संतरा, नींबू, मौसमी आदि लगाना चाहिए. इससे किसानों के आय में बढ़ोत्तरी होगी. साथ ही पर्यावरण संरक्षण होगा, जिससे जलवायु परिवर्तन को रोका जा सकता है. 

उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन का एक घटक कृषि भी है. ग्रीन हाउस गैस का उत्सर्जन एवं जलवायु परिवर्तन सर्वाधिक रसायनिक खाद एवं रसायनिक कीटनाशकों के उपयोग से भी हो रहा है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि बादल फटना, ग्लेशियर पिघलने जैसी घटनाएं हो रही है. जलवायु परिवर्तन का असर तुरंत देखने को नहीं मिलता है. उन्होंने कहा कि पलामू में की वर्षा पर ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहा कि कम बारिश होने के वावजूद भी पलामू में दूसरे राज्यों की अपेक्षा अच्छी बारिश होती है, लेकन बरसात देर से होने से समय पर कृषि कार्य नहीं हो पा रहे हैं. उन्होंने कहा कि पानी बचाने के लिए मनरेगा से टीसीबी सहित अनेक योजनाएं चलाई जा रही है. इसका प्रयोग कर वर्षा जल संचयन किया जा सकता है. उन्होंने सिमडेगा में अपने कार्यकाल के अनुभवों को साझा करते हुए लोगों को प्रेरित करते हुए कहा कि  वे किस तरीके से बोरा बांध बनवाकर जल संचयन कर उसे सिचाई के उपयोग में लाया. उन्होंने कहा कि यहां भी उस तरीके के कार्य कर पानी को रोकना होगा. पानी रूकने से भूमिगत जलस्तर भी बढ़ेगा. 

उन्होंने कहा कि व्यवसायी वर्गों को भी जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर कार्य करना चाहिए. साथ ही उन्हें कृषि कार्य को बढ़ावा देने में अपनी भूमिका निभानी चाहिए. 

क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक, पलामू संजय कुमार सुमन ने कहा कि जलवायु परिवर्तन अति चिंतनीय विषय है. इससे संपूर्ण विश्व में खलबली मची है. इसके लिए विभाग व व्यक्ति विशेष मिलकर व्यवहारिक रूप से सामूहिक कार्य करें, तो इसके सार्थक परिणाम निकलेंगे. उन्होंने कहा कि पौधरोपण कर जलवायु परिवर्तन को रोका जा सकता है.जलवायु परिवर्तन को रोकने में वन का महत्वपूर्ण भूमिका है. काफी संख्या में पौधे लगाये जाएं. वन विभाग व नाबार्ड के सहयोग से कई योजनाएं चल रही है. इसमें नदी तट पर पौधरोपण का कार्य महत्वपूर्ण है. 

पलामू व्याघ्र परियोजना दक्षिणी प्रमंडल के उपनिदेशक मुकेश कुमार ने जलवायु परिवर्तन के कारण और जंगल के महत्व को समझाते उन्होंने बताया कि जलवायु परिवर्तन का सबसे ज्यादा असर गरीबों पर पड़ता है, क्योंकि खेती एवं पशुपालन कम होने से जंगलों पर उनकी निर्भरता बढ़ती है और वे अवैध तरीकों से वनों की कटाई कर जीविकोपार्जन का साधन जुटाते हैं. ऐसे में खेती को बढ़ावा मिलनी चाहिए, ताकि वनों का संरक्षण हो.

उन्होंने कहा कि वन विभाग की ओर से कई योजनाएं संचालित की जा रही है जिसके माध्यम से जलवायु परिवर्तन को कम किया जा सकता है.

डीएफओ राहुल कुमार ने कहा कि नाबार्ड के सहयोग से वन विभाग द्वारा नदी तट पर पौधरोपण का कार्य किया गया, जिसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं. पेड़ -पौधों से जलवायु परिवर्तन के गति को कम किया जा सकता है. उन्होंने सभी को पौधा लगाने एवं पेड़ बचाने के लिए प्रेरित किया. 

कृषि विज्ञान केंद्र बालूमाथ की मुख्य वैज्ञानिक सुनीता कान्डयान ने जलवायु परिवर्तन पर चिंता जाहिर करते हुए  कहा कि कृषि कार्य को बढ़ावा देकर जलवायु परिवर्तन को कम किया जा सकता है. उन्होंने मछली पालन, पशुपालन, मधुमक्खी पालन आदि के माध्यम से किसानों को समृद्ध करने की बातें कही. किसान समृद्ध होंगे तो वनों की कटाई नहीं करेंगे. इसे जलवायु परिवर्तन को रोकने में सहयोग मिलेगी.

नाबार्ड के डीडीएम शालीन लकड़ा ने बैठक का विषय प्रवेश कराते हुए जलवायु परिवर्तन पर चर्चा की. उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए  हमलोगों को जागरूकता फैलाना होगा और सभी को सामूहिक प्रयास करनी होगी. कार्यक्रम का संचालन करते हुए कृषि विज्ञान केंद्र, चियांकी के कीट विशेषज्ञ संजय कुमार ने जलवायु परिवर्तन पर नाबार्ड के कार्यो की चर्चा की. 

कार्यक्रम में जिला कृषि पदाधिकारी अरुण कुमार, जिला मत्स्य पदाधिकारी, भूमि संरक्षण पदाधिकारी सहित सेसा के महासचिव कौशिक मल्लिक, कार्यकारी निदेशक जसवीर बग्गा, नाबार्ड के डीडीएम शालीन लकड़ा सहित नाबार्ड एवं प्रमुख स्वयंसेवी संस्थानों के प्रतिनिधि एवं प्रगतिशील कृषक उपस्थित थे.

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