रांची: राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग नई दिल्ली आयोग के कार्यालय में सीसीएल के विस्थापितों को जमीन के बदले मुआवजा एवं नौकरी एवं अन्य लाभ को लेकर आयोग के अध्यक्ष नंदकुमार साय के अध्यक्षता में बैठक संपन्न हुई.
बैठक में विस्थापितों के नेता झारखंड मुक्ति मोर्चा के महासचिव एवं विस्थापित मोर्चा के अध्यक्ष फागु-बेसरा के द्वारा सीसीएल के भुरकुण्डा, पुण्डी, कुजू, गिद्दी, बिरसा, तापिन, परेज, करमा, तोपा, राजरप्पा आदि परियोजना में आदिवासी जनजातियों का वर्षों से मुआवजा लम्बित है.
बेसरा ने आयोग के समक्ष भुरकुण्डा परियोजना के अधिग्रहीत 2228 एकड़ भूमि जिसमें 810 एकड़ रैयती भूमि जिसका मुआवजा नहीं मिला है. जमीन 400 एकड़ कम्पनी ने उपयोग कर लिया गया है. हेसागढ़ा 34 एकड़ रैयती भूमि एवं पुण्डी परियोजना के माण्डू ग्राम टोला महुआटाड़ 114 एकड़ सत्यापित रैयती मान्यता प्राप्त भूमि का उपयोग करने के बाद भी मुआवजा नहीं दिया गया है.
सीसीएल के सीएमडी गोपाल सिंह ने सत्यापित रैयती मान्यता प्राप्त गैरमजुरआ बन्दोबस्ती एवं रैयती भूमि का नौकरी और मुआवजा तीन महीने में देने का आश्वासन दिया है. भुरकुण्डा परियोजना के ग्राम देवरीया एवं दुंदवा के 810 एकड़ रैयती भूमि के संबंध में जांचोंपरांत निर्णय लिया जाएगा.
कोल इंडिया का पुनर्वास नीति एवं पुनर्वास कानून 2013 के अनुपालन और भूमि का सत्यापन में राज्य सरकार के अधिकारियों का सहयोग नहीं मिलने की बात सीसीएल के सीएमडी गोपाल सिंह ने आयोग के समक्ष रखी.
आयोग के द्वारा कोल इंडिया सीसीएल के सीएमडी एवं विस्थापितों की और से फागू बेसरा के पक्ष सुनने के बाद आयोग के अध्यक्ष नंद कुमार साय ने निर्णय दिया है कि नया भूमि अधिग्रहण एवं पुनर्वास कानून के तहत विस्थापितों को अधिकार मुआवजा नौकरी पुनर्वास अन्य लाभ नियमतः देना सुनिश्चित करें.
बेसरा एवं कम्पनी के द्वारा उठाए गए मुद्दों पर ठोस कदम उठाने के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक पुनः करने का निर्देश दिया, जिसमें कोयला सचिव भारत सरकार कोयला मंत्रालय, प्रधान सचिव भूमि एवं राजस्व विभाग झारखंड सरकार सीसीएल क्षेत्र जिला के सभो उपायुक्त कोल इंडिया अध्यक्ष सीसीएल के सीएमडी शामिल होंगे.

