परमवीर चक्र विजेता अल्बर्ट एक्का की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि
रांची:- देश के प्रथम राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ राजेंद्र प्रसाद एवं क्रांतिकारी खुदीराम बोस की जयंती एवं परमवीर चक्र विजेता अल्बर्ट एक्का चौक की पुण्यतिथि पर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष डॉ रामेश्वर उराँव,विधायक दल नेता आलमगीर आलम, कृषि मंत्री बादल पत्रलेख , प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता आलोक कुमार दूबे, लाल किशोर नाथ शाहदेव, डॉ राजेश गुप्ता छोटू, प्रदेश अल्पसंख्यक कांग्रेस के अध्यक्ष शकील अख्तर अंसारी, सनी टोप्पो,एवं नीरज भोक्ता ने तीनों महान विभूतियों को श्रद्धा सुमन अर्पित किया.प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ रामेश्वर उरांव के बरियातू स्थित आवास पर श्रद्धांजलि समारोह आयोजित कर तीनों दिवंगत महापुरुषों के चित्र पर माल्यार्पण किया एवं दीप प्रज्वलित कर श्रद्धा सुमन अर्पित किया.
श्रदांजलि समारोह में बोलते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ रामेश्वर उरांव ने कहा कि राजेंद्र प्रसाद असाधारण व्यक्तित्व के व्यक्ति थे. डॉ राजेंद्र प्रसाद अपने स्कूल और कॉलेज के दिनों में काफी मेधावी छात्र माने जाते थे,उनके बुद्धिमता पर अध्यापक ने उनके उत्तर पुस्तिका पर लिख दिया था कि परीक्षा देने वाला परीक्षा लेने वाला से ज्यादा बेहतर है.चंपारण में जब आंदोलन शुरू हुआ तो डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद तब तक गांधी जी के साथ रहे जब तक उन्हें जमानत नहीं मिल गया. 1934 में बिहार में भूकंप आया तो डॉक्टर राजेंद्र बाबू ने भूकंप पीड़ित लोगों की सहायता की और पूरे राज्य में कांग्रेस का वोलेंटियर तैयार किया और 1934 में मुंबई अधिवेशन में उन्हें कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया. डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद आदिवासियों के सबसे बड़े हितैषी थे, 1948 में राजेंद्र बाबू आदिवासी आदिम जाति सेवा मंडल के अध्यक्ष बने और राष्ट्रपति बनने के बाद भी उन्होंने यह पद नहीं छोड़ा और 1963 तक आदिम जाति सेवा मंडल के अध्यक्ष बने रहें एवं आदिवासियों के कल्याण के कई योजनाएं बनाई. डा रामेश्वर उराँव ने परमवीर चक्र विजेता अलबर्ट एक्का एवं खुदीराम बोस के जीवन पर प्रकाश डाला एवं महान शख्सियत बताया.
विधायक दल नेता एवं ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम ने कहा कि डॉ राजेंद्र प्रसाद का भारत की आजादी और आजादी के बाद भी देश के लिए किया गया योगदान सराहनीय है. राष्ट्र के प्रति उनके योगदान को देखते हुए उन्हें देश के सबसे बड़े पुरस्कार भारत रत्न से सम्मानित किया गया. आलमगीर आलम ने कहा वर्तमान पीढ़ी को राजेंद्र प्रसाद के किए गए कार्यों पर चलना चाहिए, उन्होंने कहा भारत के स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास महान वीरों और उनके सैंकड़ों साहसिक कारनामों से भरा पड़ा है,ऐसे ही क्रांतिकारियों की सूची में एक नाम खुदीराम बोस का है, देश की आजादी के लिए मात्र 19 साल की उम्र में फांसी पर चढ़ गए थे.
कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने इस अवसर पर कहा कि देश राजेंद्र प्रसाद की 136 वी जयंती ,खुदीराम बोस की 127 वी जयंती एवं परमवीर अलबर्ट की 49 वीं पुण्यतिथि मना रहा है, लेकिन वर्तमान में जो स्थितियां और चुनौतियां हैं राजेंद्र बाबू का संविधान खतरे में है खुदीराम बोस का हिंदुस्तान खतरे में है तो वहीं अल्बर्ट एक्का का बलिदान खतरे में है तो वहीं दूसरी तरफ हरित क्रांति और जय जवान जय किसान की कवायद पर प्रहार किए जा रहे हैं. भारत-पाक युद्ध में अल्बर्ट एक्का वतन और सैनिक हुनर का प्रदर्शन करते हुए अपने इकाई के सैनिकों की रक्षा की थी, भारत सरकार ने उनके बलिदान को देखते हुए मरणोपरांत सैनिकों को दिए जाने वाले उच्चतम परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था .बादल पत्रलेख ने कहा डॉ राजेंद्र प्रसाद स्वतंत्रता आंदोलन के अग्रणी नेताओं में से एक थे जिन्होंने नमक तोड़ो आंदोलन, भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जेल में यातनाएं भी सही. आजाद भारत में डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद के योगदान हमेशा अनुकरणीय रहेंगे. श्रद्धांजलि समारोह के उपरांत मंत्री बादल पत्रलेख, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता आलोक कुमार दूबे,लाल किशोर नाथ शाहदेव, डा राजेश गुप्ता छोटू,शकीलं अख्तर अंसारी अलबर्ट चौक पर पहुंचे जहां अलबर्ट एक्का की मूर्ति पर माल्यार्पण किया एवं उन्हें नमन किया तत्पश्चात ओबरब्रीज डोरंडा स्थित राजेंद्र प्रसाद की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्बांजलि प्रकट की.

