रांची: स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग विभाग के सचिव मदन कुलकर्णी ने कहा कि आज दोपहर तक राज्य में कोरोनावायरस संक्रमित पॉजिटिव मरीजों की संख्या 125 है. इन 125 पॉजिटिव मामलों में 34 मरीजों की रिकवरी भी हो चुकी है. राज्य में अब भी 89 पॉजिटिव केस सक्रिय हैं.
उन्होंने कहा कि झारखंड में कोरोना पॉजिटिव मरीजों का ग्रोथ रेट 2.52 प्रतिशत है. अब तक राज्यभर से 15130 टेस्ट किए गए हैं. कोविड-19 टेस्ट किए गए मरीजों की संख्या में कुल 99.17 प्रतिशत टेस्ट की रिपोर्ट नेगेटिव पाए गए हैं.
उन्होंने कहा कि राज्य में कोविड-19 संक्रमण से मृत्यु दर 2.4 प्रतिशत है. उक्त बातें स्वास्थ्य चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण सचिव नितिन मदन कुलकर्णी ने आज झारखंड मंत्रालय के सभागार में आपदा सचिव अमिताभ कौशल एवं परिवहन सचिव के रवि कुमार के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में पत्रकारों को संबोधित करते हुए कही.
बनाए गए हैं 46 कंटेनमेंट जोन
स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग विभाग के सचिव नितिन मदन कुलकर्णी ने कहा कि राज्य में कुल 46 कंटेनमेंट जोन बनाए गए हैं. बनाए गए कुल कंटेनमेंट जोन में 71868 परिवार निवास करते हैं. राज्य में विभिन्न कंटेनमेंट जोन से अब तक 8 हजार 71 लोगों का सैंपल जांच किया गया है.
उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों से वापस आने वाले छात्र एवं प्रवासी मजदूरों के स्वास्थ्य अनुश्रवण राज्य सरकार लगातार कर रही है. स्वास्थ्य जांच को लेकर किसी प्रकार की कमी या लापरवाही नहीं बरती जा रही है.
28 अप्रैल से 5 मई तक मात्र 8 पॉजिटिव केस आए थे
उन्होंने बताया कि 28 अप्रैल से 5 मई 2020 तक मात्र आठ नए पॉजिटिव केस आए थे. परंतु पिछले दिनों फिर यह आंकड़ा बढ़ा और एक ही दिन में 10 पॉजिटिव केस मिले. उन्होंने कहा कि यह संभव है कि पॉजिटिव केसों की संख्या प्रतिदिन कम ज्यादा हो सकती हैं.
जांच बढ़ाने का हो रहा है लगातार प्रयास
सचिव नितिन मदन कुलकर्णी ने कहा कि कोविड-19 संक्रमण के बढ़ते आंकड़ों को देखते हुए राज्य में जांच की प्रक्रिया पर लगातार तेजी लाने का प्रयास राज्य सरकार द्वारा किया जा रहा है. प्रत्येक जिलों में भी कोविड-19 की जांच हो सके इस हेतु जांच केंद्र बनाए जा रहे हैं.
राज्यभर से 51935 गर्भवती महिलाओं की सूची की गई है तैयार
सचिव नितिन मदन कुलकर्णी ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा राज्य में कुल 51935 गर्भवती महिलाओं की सूची तैयार की गई है. इस सूची के अनुसार इन गर्भवती महिलाओं का मई महीने के अंत तक प्रसव होना है. उन्होंने कहा कि प्रोटोकॉल के तहत इन सभी गर्भवती महिलाओं को ससमय प्रसव से संबंधित सभी चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध हो यह सरकार की प्राथमिकता है.
निजी चिकित्सकों एवं चिकित्सा संस्थानों को कार्यरत रहने का निर्देश राज्य सरकार द्वारा दिया गया है
सचिव नितिन मदन कुलकर्णी ने बताया कि 4 मई को ही राज्य सरकार द्वारा सरकारी चिकित्सकों एवं चिकित्सा संस्थानों को निर्देश दिया गया है कि कोविड-19 के अलावा अन्य बीमारियों का भी उपचार प्राथमिकता के तौर पर किया जाए इस निमित्त उन्हें अपने संस्थानों को कार्यरत रखा जाए. सभी अस्पताल मरीजों का इलाज सुनिश्चित करें यह उनकी जिम्मेदारी है.
उन्होंने विश्वास जताया कि संभवत अब ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होगी जहां पर मरीजों के उपचार संबंधी अस्पताल कोई लापरवाही बरतेंगे.
वाहन पास हेतु epassjharkhand.nic.in पर आवेदन कर सकते हैं
आपदा विभाग के सचिव अमिताभ कौशल ने कहा कि वैसे मजदूर जो अभी भी दूसरे राज्यों में फंसे हैं वे राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए कंट्रोल रूम के नंबर एवं हेल्पलाइन नंबर पर अपना रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं. राज्य सरकार देश के विभिन्न राज्य सरकारों से समन्वय स्थापित कर प्रवासी मजदूरों को प्राथमिकता के तौर पर वापस लाने का कार्य निरंतर कर रही है.
उन्होंने कहा कि प्रवासी मजदूरों को वापस आने में किसी प्रकार का कोई किराया अथवा अपना पैसा देने की आवश्यकता नहीं है. उन्होंने कहा कि अब तक 12 ट्रेनों से प्रवासी मजदूर झारखंड वापस लौटे हैं. रेल और बस सेवा से अब भी लोगों का आना जारी है.
उन्होंने कहा कि अब इंटर स्टेट, इंटर डिस्ट्रिक्ट इत्यादि वाहन पास हेतु epassjharkhand.nic.in पर अपना आवेदन दे सकते हैं. पास निर्गत करने में लोगों को इससे काफी सुगमता होगी.
उन्होंने बताया कि कोरोना संक्रमण से निपटने के निमित्त राज्य सरकार द्वारा अब तक कुल 57 करोड़ 83 लाख 28 हजार राशि आवंटित हो चुकी है.
परिवहन सचिव के रवि कुमार ने प्रवासी मजदूरों एवं छात्र-छात्राओं के रेल एवं बस सेवा संबंधित जानकारी एवं गाइडलाइन के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रेस कांफ्रेंस के माध्यम से पत्रकारों को दी.
उन्होंने बताया कि अब तक 12 ट्रेनें छात्र-छात्राओं एवं प्रवासी मजदूरों को लेकर झारखंड पहुंची हैं. जिसमें 2146 छात्र-छात्राएं शामिल हैं. कुल 10 हजार 55 लोग ट्रेन के माध्यम से वापस पहुंच चुके हैं, वहीं बस सेवा से 6500 लोग एवं निजी वाहन अथवा अपने संसाधन से 2048 लोग अपने घरों तक पहुंचे हैं.

