नई दिल्ली: मंत्रालय(भारत सरकार) ने संसद को सूचित किया कि वी. डी सावरकर के द्वारा अंग्रेजों को दी गयी दया याचिका अंडमान और निकोबार के सेलुलर जेल संग्रहालय में प्रदर्शित नहीं की गई, क्योंकि उनका कोई रिकॉर्ड कला और संस्कृति विभाग के पास उपलब्ध नहीं है.

इसके बाद यह स्पष्ट हो गया है कि वीर सावरकर ने अंग्रेजो को किसी प्रकार का माफीनामा नही लिखा था. वो जेल से किस प्रकार बाहर आये अब इसपर एक नया विवाद खड़ा हो गया है. फिलहाल कला एवं संस्कृति विभाग ने वीर सावरकर के विरोधियो को जबरदस्त झटका दे दिया है.
क्या था विवाद
भारत के वर्तमान विपक्ष पार्टियों समेत विपक्ष के कई सहयोगी पार्टियों का मानना है कि वीर सावरकर 1913 में अंग्रेजो से माफी मांगने के बाद अंडमान निकोबार जेल से बाहर निकाले गए थे.

