नई दिल्ली: कोरोना महामारी के हवा में फैलने के सबूत को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भी स्वीकार किया है. दुनिया भर के वैज्ञानिकों के एक समूह द्वारा विश्व स्वास्थ्य संग्इन को कोरोना को लेकर अपने दिशानिर्देशों को अपडेट करने का आग्रह किया था. इसमें कहा गया था कि कोरोना का वायरस के हवाई प्रसार के सबूत मिले हैं.
WHO में COVID-19 महामारी पर तकनीकी प्रमुख डॉ मारिया वान केर्कोव ने प्रेस वार्ता में कहा, ‘हम COVID-19 के प्रसारण के तरीकों में से एक एयरबोर्न ट्रांसमिशन और एयरोसोल ट्रांसमिशन की संभावना के बारे में बात कर रहे हैं.’ डब्ल्यूएचओ ने यह भी कहा कि वायरस का प्रसार तेज हो रहा था और भविष्य में मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है.
डॉ. माइकल रयान ने कहा, ‘अप्रैल और मई में हम एक दिन में 100,000 मामलों से निपट रहे थे, लेकिन आज हम एक दिन में 200,000 के साथ काम कर रहे हैं.’ रयान ने कहा कि मौतों की संख्या फिलहाल स्थिर है, लेकिन उन्होंने आगाह किया कि मामलों में वृद्धि होने के बाद मरने वाले लोगों की संख्या में इजाफा हो सकता है. रेयान ने कहा कि मामलों में महत्वपूर्ण उछाल अधिक व्यापक परीक्षण के कारण नहीं था.
डब्ल्यूएचओ की तकनीकी समिति के सदस्यों ने कहा कि वे इस बारे में एक वैज्ञानिक ब्योरा प्रकाशित करने पर काम कर रहे हैं कि हवा में कोरोनो वायरस कैसे और क्यों फैल सकता है. तकनीकी समिति के प्रमुख डॉ मारिया वान केरखोव ने कहा, ‘हम कई हफ्तों से इस पर काम कर रहे हैं और हमने (वैज्ञानिक) समूहों की एक बड़ी संख्या के साथ काम किया है.’
200 से अधिक वैज्ञानिकों द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट के बाद डब्ल्यूएचओ को यह स्वीकार करने के लिए कहा कि कोरोनो वायरस हवा में फैल सकता है. इसका मतलब होगा कि महामारी को रोकने के लिए किए जा रहे कुछ मौजूदा उपायों में बदलाव हो सकते हैं. तकनीकी समिति के सदस्य प्रो बेनेडेटा एलेग्राज़ी ने कहा कि इस तथ्य के बारे में सबूत है कि कोरोना वायरस हवा में फैल सकता है, लेकिन ‘यह निश्चित नहीं है.

