रांची: कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए लोगों से आपास में दूरी बनाये रखने की अपील की जा रही है. सोशल डिस्टेंसिंग का सख्ती से पालन करने को कहा जा रहा है. जेलों में भी इसका पालन कराने के लिए कैदियों को अंतरिम जमानत या पैरोल पर छोड़ने का निर्णय हुआ है.
Also Read This: 24 घंटे में 2000 लोगों की मौत, संक्रमितों की संख्या 4 लाख के पार
जानकारी के मुताबिक झारखंड की जेलों में बंद 7 साल तक की सजा पाये कैदियों को छोडे़ जाने का निर्णय सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित उच्चस्तरीय कमेटी ने लिया है. कमेटी की बैठक बीते मंगलवार को हुई. बैठक की अध्यक्षता हाईकोर्ट के जस्टिस एचसी मिश्रा ने की थी. उक्त बैठक में कैदियों को छोड़ने पर चर्चा की गई. बताया जाता है कि इस क्रम में यह बात सामने आई कि बड़े और आर्थिक अपराध में शामिल कैदियों को नहीं छोड़ जाएगा.
लालू को राहत मिलना मुश्किल
कैदियों को अंतरिम जमानत या पैरोल पर छोड़े जाने के निर्णय का लाभ चारा घोटाले के आरोपी लालू प्रसाद यादव को मिलना मुश्किल लग रहा है. उन्हें कोर्ट ने आर्थिक मामलों में 14 साल की सजा सुनाई है. हालांकि राज्य के कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने पहले कहा था कि राज्य सरकार लालू प्रसाद को पैरोल देने पर विचार कर रही है. पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने भी लालू को पैरोल देने की गुहार लगाई है.
Also Read This: हमें डोनाल्ड ट्रंप के दान की जरूरत नहीं: जावेद ज़रीफ
कैदियों की यह है संभावित संख्या
राज्य की जेलों में 7 साल या उससे कम सजा पाने वाले 997 कैदी हैं. 7 साल तक संभावित सजा वाले 2027 विचाराधीन कैदी हैं. वहीं 7 से 10 साल की सजा पाने वाले संभावित विचाराधीन कैदियों की संख्या 783 है. ऐसे में करीब 3024 कैदियों को निर्णय से राहत मिलने की संभावना है.

