दिल्ली: कोरोना महामारी ने देश की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ शिक्षा को भी बुरी तरह प्रभावित किया है. लड़कियों की स्कूली शिक्षा को लेकर हुए नए अध्ययन में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. अध्ययन के मुताबिक ऐसा माना जा रहा है कि सेकंडरी स्कूल में पढ़ने वाली दुनियाभर की दो करोड़ लड़कियां अब कभी स्कूल ही ना जा पाएं.
एक स्टडी रिपोर्ट के मुताबिक, कम और मध्यम आयवर्ग के देशों के सेकेंडरी स्कूल में पढ़ रही लगभग दो करोड़ लड़कियां कोरोना खत्म होने के बाद कभी स्कूल नहीं लौट सकेंगी. ‘राइट टू एजुकेशन फोरम’ ने ‘सेंटर फॉर बजट एंड पॉलिसी स्टडीज’ और ‘चैंपियंस फॉर गर्ल्स एजुकेशन’ के साथ मिलकर भारत के भी पांच राज्यों में ये स्टडी की है.
मैपिंग द इंपैक्ट ऑफ कोविड-19 ऑन द लाइव्स एंड एजुकेशन ऑफ चिल्ड्रन इन इंडिया’ नाम से हुई इस स्टडी की रिपोर्ट 26 नवंबर को जारी की गई. इसमें यूनिसेफ के एजुकेशन प्रमुख टेरी डर्नियन और बिहार स्टेट कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स की अध्यक्ष प्रमिला कुमारी प्रजापति ने स्टडी में उठाए गए मुद्दे पर चिंता जताई है.
इस अध्ययन में यह बात भी सामने आई कि 37 फीसदी लड़कियां इस बात पर निश्चित नहीं हैं कि वो कभी स्कूल लौट पाएंगी. अध्ययन में 37 फीसदी लड़कों और 27 फीसदी लड़कियों ने माना कि उन्हें पढ़ाई करने के लिए फोन मिल पाता है. इस अध्ययन में शामिल कुल परिवारों में से 52 फीसदी परिवारों के पास टीवी सेट था, लेकिन केवल 11 फीसदी बच्चों ने टीवी पर पढ़ाई से संबंधित प्रोग्राम देखने की बात कही.

