नई दिल्ली: राजस्थान में सियासी रार के बीच राज्य विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने सचिन पायलट समते 19 बागी विधायकों के खिलाफ अयोग्यता कार्यवाही पर रोक लगाने वाले राजस्थान हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.
कोर्ट में मामले की सुनवाई जारी है और स्पीकर की तरफ से वरिष्ठ वकिल कपिल सिब्बल पक्ष रख रहे हैं. उन्होंने कहा कि कोर्ट निर्णय का समय बढ़ाने के लिए स्पीकर को निर्देश नहीं दे सकता. यह न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में नहीं है.
दूसरी ओर सचिन पायलट ने इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल कर दी है, ताकि बगैर उनका पक्ष सुने कोर्ट मामले में कोई आदेश न जारी कर दे. मामले में आज तीन जज की पीठ सुनवाई कर रही है.
याचिका में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के ‘किहोतो होलां’ केस का उदाहरण दे हाई कोर्ट द्वारा स्पीकर को कार्यवाही से रोकने का आदेश को गलत बताया गया है.
‘किहोतो होलां’ केस में दी गई व्यवस्था के मुताबकि कोर्ट स्पीकर के निर्णय लेने या कार्यवाही में दखल नहीं दे सकता. स्पीकर ने याचिका में हाई कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगाने की भी मांग की है.
याचिका में संविधान के अनुच्छेद 212 का हवाला दे कहा गया है कि सदस्यों को जारी किया गया नोटिस कार्यवाही का हिस्सा है और इसकी न्यायिक समीक्षा नहीं हो सकती.
इसमें यह भी कहा गया कि नोटिस में विधायकों से जवाब मांगी गई है और ये सदस्यों की अयोग्यता के मामले में अंतिम निर्णय नहीं है. यह इस प्रक्रिया की शुरुआत है.

