रांची: मजदूरों को गुलाम बनाने के लिए श्रम कानूनों को मालिक पक्षीय कोड में बदले जाने, कृषि विरोधी कानूनों को लागू करने, राष्ट्रीय संपत्ति की लूट और बढती महंगाई के खिलाफ ट्रेड यूनियनों और श्रमिक फेडरेशनो द्वारा 26 नवंबर को आयोजित देशव्यापी हड़ताल को सीपीआई (एम) ने अपना समर्थन दिया है. यह निर्णय आज संपन्न हुयी पार्टी की झारखंड राज्य कमिटी की आनलाइन बैठक मे लिया गया. बैठक में पार्टी की झारखंड इकाई की प्रभारी और पालिट ब्यूरो सदस्य बृंदा कारात भी दिशानिर्देश के लिए उपस्थित थी.
बैठक में पार्टी की केंद्रीय कमिटी द्वारा लिए गए निर्णयों की रिपोर्टिंग करते हुए बृंदा कारात ने कहा कि मोदी सरकार कोरोना महामारी का लाभ उठा कर इसकी आड़ में मजदूरों और किसानों को तबाह करने के एजेंडे पर काम कर रही है ताकि बड़े कारपोरेट घरानों से से किए गए वायदे को पुरा किया जा सके.
उन्होंने कहा कि कोविड – 19 से निपटने में समाजवादी व्यवस्था की श्रेष्ठता प्रमाणित हुयी है और पूंजीवादी व्यवस्था इस बीमारी की दलदल मे बुरी तरह फंस चुकी है. इसलिए दुनिया भर मे सबसे ज्यादा मौत के शिकार अमेरिकी नागरिक हुए हैं उसके बाद भारत और ब्राजील का नंबर आता है.
युरोप के पूंजीवादी देशों में कोरोना महामारी का प्रकोप एक बार फिर वहां के लोगों को अपने चपेट में ले रहा है जबकि समाजवादी देशों ने इस महामारी पर एक प्रकार से काबू पा लिया है. जहां तक इस बीमारी के वैक्सीन का सवाल है दुनियाभर की बहुराष्ट्रीय कंपनियां आपस मे होड़ लगाकर इस त्रासदी को भुनाने की कोशिश मे है ताकि वैक्सीन के बाजार पर कब्जा किया जा सके.
उसी प्रकार इस महामारी से विश्व अर्थव्यवस्था पर पड़े विपरीत प्रभाव का मुकाबला करने मे भी विश्व पूंजीवाद फिसड्डी साबित हुआ है यहां जीडीपी धराशायी हो रही है लेकिन समाजवादी व्यवस्था वाले देशों में जीडीपी बढ रही है. हमारे देश भारत मे भी जीडीपी माइनस मे चली गई है लेकिन भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली मोदी सरकार बड़ी ही निर्लज्जता से अर्थव्यवस्था के मजबूत होने का ढोल पीट रही है.
सीपीआई (एम) सरकार के इन हथकंडो को वेनकाब करने के लिए जल्द ही एक बड़ी मुहिम छेड़ेगी. बैठक में राज्य के 23 जिलों के जिला सचिवों के अलावा राज्य कमिटी सदस्यों सहित कुल 63 साथियों ने इस आनलाइन बैठक मे हिस्सा लिया.

