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क्रेडिट लिंकेज कार्यक्रम से मिल रही सफलता, सोपान गढ़ रहीं ग्रामीण महिलाएं

by bnnbharat.com
February 10, 2021
in समाचार
क्रेडिट लिंकेज कार्यक्रम से मिल रही सफलता, सोपान गढ़ रहीं ग्रामीण महिलाएं
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विगत एक साल में करीब 550 करोड़ क्रेडिट लिंकेज के रुप में सखी मंडलों को कराया गया उपलब्ध

रांची: झारखंड की ग्रामीण महिलाएं खेती, पशुपालन एवं कारोबार में भी हाथ आजमाते हुए सफल उद्यमी के रुप में अपनी पहचान बना रही हैं. ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत झारखंड स्टेट लाईवलीहुड प्रमोशन सोसाईटी ऐसी महिलाओं को हर संभव सहायता कर रहा है, जिससे इनका आर्थिक स्वावलंबन सुनिश्चित हो सके.

ग्रामीण महिलाओं को सखी मंडल से जोड़कर सशक्त आजीविका उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है. महिलाओं के इस सशक्तिकरण में सबसे अधिक सहायक क्रेडिट लिंकेज बन रहा है. झारखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत राज्य में अब तक 2.54 लाख सखी मंडल के गठन के जरिए करीब 32 लाख परिवारों को सखी मंडल में जोड़ा गया. करीब एक लाख सखी मंडलों को 387 करोड़ की राशि सामुदायिक निवेश निधि एवं लाखों सखी मंडलों को कुल 1824 करोड़ की राशि ग्रामीण आजीविका मिशन के क्रेडिट लिंकेज के जरिए बैंकों से उपलब्ध कराया गया है. सखी मंडल के जरिए मिलने वाली इन आर्थिक सहायता की मदद से ग्रामीण महिलाएं सफलता के सोपान स्थापित कर रहीं हैं.

क्रेडिट लिंकेज से तय हो रहा उद्यमी बनने का सफर

सुदूर गांव की रहने वाली एक साधारण महिला के लिए खुद के दुकान का संचालन किसी सपने से कम नहीं था लेकिन, देवंती देवी ने सखी मंडल से जुड़कर इस सपने को पूरा किया और अच्छी आमदनी कर रही है.

गिरिडीह जिले की पोरदाग गांव की रहने वाली 42 वर्षीय देवंती ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि वह दो दुकानों का मालकिन बनेंगी. सखी मंडल में पुस्तक संचालिका का कार्य करते हुए एवं अन्य दीदियों के साथ बैठकर देवंती को हौसला एवं जीवन में कुछ कर गुजरने का जज्बा मिला.

देवंती ने सखी मंडल से जुड़कर कई महिलाओं को अपना व्यवसाय शुरू कर अच्छी आमदनी करते देखा था. वो बताती है कि दूसरों को सफल उद्यमी बनते देख मैने भी हिम्मत जुटाई और तीन साल पहले अपने सखी मंडल को मिलने वाले क्रेडिट लिंकेज से 50,000 का लोन लेकर चाय-नाश्ता का होटल शुरू किया, जिससे मेरी रोजाना की 500 से 1000 की आमदनी हो जाती है.

देवंती यहीं नहीं रुकी अपनी सफलता से उत्साहित होकर उसने एक साल के बाद सखी मंडल के लोन को चुकाकर फिर से एक राशन दुकान की शुरूआत की. इस राशन दुकान के चलाने में उनके बेटे भी उनकी मदद करते है. इस तरह सरकार द्वारा मिल रहे आर्थिक सहयोग से ग्रामीण महिलाओं को आजीविका का आधार और खुद को साबित करने का अवसर प्राप्त हो रहा है.

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