तनु कुमार,
बिहार(मुंगेर): नमामि गंगे परियोजना के तहत गंगा को प्रदूषण मुक्त कराने को लेकर मुंगेर में विद्युत शवदाह गृह के जीर्णोद्धार का कार्य दो वर्षो में भी पूरा नहीं हो सका. मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2018 में 2.15 करोड़ की लागत से जीर्णोद्धार का कार्य शुरू हुआ था. लोगों में उम्मीद जगी थी कि पिछले कई वर्षों से बंद विद्युत शवदाह गृह अब पुन: चालू हो जायेगा. जिससे गंगा को प्रदूषण से बचाया जा सकेगा और गंगा नदी में शव को प्रवाहित भी नहीं किया जायेगा. पर अब तक इसके जीर्णोद्धार का कार्य पूरा नहीं किया जा सका शायद इसके जीणोद्धार में नगर प्रशासन की रूचि नहीं जग रही.
गंगा का जलस्तर बढ़ने के बाद लोगों को होती है परेशानी
नगर निगम ने बिहार राज्य जल पर्षद बोर्ड को विद्युत शवदाह गृह के जीर्णोद्धार का काम सौंपा था. बल्कि इसके लिए विभाग से प्राप्त आवंटन राशि को भी ट्रांसफर कर दिया था. वाबजूद धीमी गति से कार्य होने कें कारण अब तक काम को अंजाम नहीं दिया जा सका है. मुंगेर के इस गंगा घाट पर बहुत दुर दुर से लोग आते है जिससे लोगों को अंतिम संस्कार करने में काफी परेशानी उठानी पड़ रही है. खासकर बाढ़ के समय गंगा का जलस्तर बढ़ जाने से लोगों की परेशानी औरअधिक बढ़ जाती है.
शमशान घाट पर मूलभूत सुविधाओं के अभाव के कारण भी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता शमशान घाट पर बना शौचालय भी देख-रेख और संसाधान के अभाव में बेकार पड़ा है. इससे अंतिम क्रिया में आए लोगों को शौचालय, पानी जैसे मूलभूत समस्याओं का सामना करना पड़ता है.
शमशान घाट पर मनमानी तरिके से कि जा रही वसूली
कोरोना संकट काल में भी शमशान घाट पर जिस तरह मनमानी तरिके से शवों को जलाने के नाम पर तसिली कि जा रही है. वह जरिया बंद कराने कि कवायत ना ही नगर निगम कर रही है ना ही प्रशासन.
1987 में हुआ था विद्युत शवदाह गृह का निर्माण
वर्ष 1987 में मुंगेर के लाल दरवाजा गंगा घाट में विद्युत शवदाह गृह का निर्माण हुआ था. 1987 से लेकर 1997 तक विश्वास बोर्ड के अंदर शवदाह गृह का कार्य हुआ. 1997 में विश्वास बोर्ड ने नगर निगम को शवदाह गृह के संचालन के लिए ट्रांसफर कर दिया. नगर निगम की निगरानी में वर्ष 2004 तक शवदाह गृह में अंतिम संस्कार का काम होता रहा. पर शवदाह गृह में बाढ़ का पानी घुस जाने से उसके मशीन में तकनीकी खराबी आ गयी. तब से विद्युत शवदाह गृह के अस्तित्व पर संकट उत्पन्न हो गया.

