जगदम्बा प्रसाद शुक्ल,
प्रयागराज: संगम की रेती पर संतों-भक्तों के समागम वाले माघ मेले पर कोविड-19 की वजह से संकट के बादल छा गए हैं. पहले जहां सितंबर से पूर्व ही पांटून पुलों,चकर्ड प्लेट मार्गों और तंबुओं का नगर बसाने के लिए ठेके हो जाते थे,वहीं इस बार अभी तक टेंडर प्रक्रिया का कार्य आरंभ ही नहीं हो सका है.
माघ मेले की तैयारी को लेकर प्रयागराज मेला प्राधिकरण की ओर से अब तक किसी तरह का खाका सार्वजनिक नहीं किया जा सका है इससे मेला प्रभावित होने की आशंका पैदा हो गई है. गंगा,यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम तट पर सदियों से लगने वाले माघ मेले को लेकर इस बार अनिश्चय की स्थिति बन गई है.
कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण की वजह से प्रयागराज मेला प्राधिकरण माघ मेले के स्वरूप को तय करने की दिशा में कदम नहीं बढ़ा सका है ऐसे में इस आध्यात्मिक और सांस्कृति महत्व वाले मेले को लेकर संतों और तीर्थ पुरोहितों की चिंता बढ़ती जा रही है. वैसे इस सांस्कृतिक आयोजन की तैयारी हर साल जुलाई से ही आरंभ हो जाया करती थी रेती पर मेला बसाने के स्वरूप के साथ ही बजट तैयार कर लिया जाता था इसके बाद सिर्फ बाढ़ का पानी सिमटने का इंतजार रहता था और पानी कम होने के साथ ही पांटून पुलों और मार्गों के साथ ही बिजली,पानी,संचार समेत अन्य संसाधनों पर काम शुरू हो जा था लेकिन इस बार अभी तक टेंडर तो दूर,रूपरेखा पर मेला प्राधिकरण की बैठक तक नहीं हो सकी है.
शासन की ओर से मेले को लेकर गाइड लाइन अभी तक न मिलने की वजह से खाका तय नहीं हो सका है. कोरोना काल में संगम की रेती पर माघ मेले का आयोजन कैसे हो,इस पर साधु-संतों से विचार विमर्श करने के लिए परिषद की सोमवार को आपात बैठक होगी. अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मौजूदगी में यह बैठक बाघंबरी गद्दी मठ में होगी.
इस बैठक में सभी 13अखाड़ों के पदाधिकारी मौजूद रहेंगे. इस बैठक में जहां हर साल संगम की रेती पर लगने वाले माघ मेले की तैयारियों और कोरोना काल में उसके आयोजन को लेकर साधु संत मंथन करेंगे. कुंभ -2019 के दौरान शुरू की गई प्रयागराज की परिक्रमा को भी जारी रखने पर भी साधु संत विचार विमर्श करेंगे.

