रांची: कोरोना को जिंदगी का हिस्सा बना चुके झारखंड के लोग जीवन में उम्मीद की रोशनी जलाए रखने के लिए आज धनतेरस के साथ शुरू हुए दीपोत्सव पर खरीददारी करने बाहर निकल रहे हैं, जिससे न केवल बाजारों में चहल-पहल बढ़ी है बल्कि कई महीनों से कारोबार की सुस्ती झेल चुके दुकानदारों के चेहरे भी खिल उठे हैं. पांच दिवसीय दीपावली महोत्सव का समापन 16 नवंबर को होगा. इसकी शुरुआत आज धनतेरस से हुई. बाजार की रौनक देखते ही बन रही है. खरीदारी पर ऑफरों की बौछार है.राजधानी रांची में करीब 500 करोड़ के कारोबार की संभावना है.
पंचांग के अनुसार, प्रतिवर्ष कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्र्योदशी को धन्वतरि त्रयोदशी मनायी जाती है, जिसे ‘धनतेरस’ कहा जाता है. ‘धनतेरस’ का पर्व आज मनाया जा रहा है. यह मूलतः आयुर्वेद के जनक धन्वन्तरि के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है. धनतेरस के दिन नये बर्तन या सोना-चांदी खरीदने की परम्परा है. धनतेरस पर बर्तन खरीदने की शुरुआत कब और कैसे हुई, इसका कोई निश्चित प्रमाण नहीं है लेकिन ऐसा माना जाता है कि जन्म के समय धन्वन्तरि के हाथों में अमृत कलश था और यही कारण इस दिन बर्तन खरीदना शुभ मानते हैं. धनतेरस धन, वैभव एवं सुख समृद्धि का प्रतीक है.
राजधानी रांची समेत पूरे राज्य के बाजारों में जिस तरह से खरीददार नजर आ रहे हैं, उससे भी कारोबारियों के चेहरे खिले नजर आए. ग्राहकों की भीड़ देख दुकानदार भी उत्साहित हैं. उन्हें उम्मीद है कि त्योहार की रौनक कोरोना से हुए नुकसान की भरपाई कर देगा. देवी-देवताओं की मूर्तियां एवं चित्रों के साथ-साथ घर-आंगन को सजाने के लिए रंग-बिरंगे बल्बों की लड़ियां, लाइटिग स्टैंड, झालर, लटकन तथा मिट्टी के डेकोरेटिव दीप उपलब्ध हैं. छोटे बल्ब की लड़ियों की बाजार में मांग अधिक है. धनतेरस के साथ-साथ कंपनियों ने भी दीपावली की खरीदारी को लेकर भी तैयारी कर रखी है. धनतेरस के अवसर पर देश में सबसे अधिक खरीदारी की जाती है. इसको देखते हुए बाजार में दुकानें पूरी तरह सजी हुई हैं.पिछले दिनों जिस तरह लोगों ने दशहरा के समय जमकर खरीदारी की है उससे कारोबारियों में उत्साह है. धनतेरस पर भी उन्हें अच्छे कारोबार की उम्मीद है.
दीपावली और धनतेरस को लेकर पटाखों, मिठाई, बर्तन और सर्राफा बाजार में रौनक बढ़ गयी है. खरीददार त्योहार की खरीददारी करने लगे हैं. बाजार में दुकानों पर भीड़ दिखाई दे रही है. लोग अन्य पूजा सामग्री के साथ ही गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां खरीदने सुबह से ही बाजारों में पहुंचने लगे हैं. लोक मान्यता के अनुसार, धनतेरस के दिन मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए धातु खरीदने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. लेकिन, धातुओं की आसमान छूती कीमत के आम जनों के पहुंच से बाहर हो जाने के कारण अब लोगों का रुझान घरेलू उपयोग की वस्तुओं की खरीद की ओर बढ़ गया है. घरेलू सामान ख़ासकर टेलीविजन, फ्रिज, वाशिंग मशीन समेत अन्य समानों की खरीद के लोग सुबह से ही दुकानों पर जुटने लगे हैं. ऑटो बाजार में कंपनियों की ओर से गाड़ियों की खरीद पर चांदी के सिक्के एवं एलईडी का उपहार देकर ग्राहकों को लुभाने के लिए बेहतरीन स्कीम शुरू की गई है. युवा वर्ग से लेकर हर तरह के लोग वाहनों की बुकिंग करा रहे हैं.

