मो. अरबाज,
चतरा: एक ओर जहां सरकार बेटी-बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा देकर बेटे-बेटियों में होने वाले फर्क को मिटाने में जुटी है. अभियान चलाकर सरकार के इस योजना का नारा बुलंद कर बेटियों को अधिकार दिलाने को ले लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किये जा रहे हैं.
बावजूद आज के आधुनिक युग में भी कई परिवारों को बेटियों के जन्म पर समाजिक कुरीतियों का सामना करना पड़ रहा है. जहां बेटियों के जन्म को किसी अपराध से कम नहीं माना जाता है.
ऐसा ही एक मामला चतरा जिले के सिमरिया थाना क्षेत्र में प्रकाश में आया है. जहां पति की हैवानियत की वजह से एक विवाहिता को उसके पति ने बेरहमी से न सिर्फ पीटा बल्कि घर से भी बेदखल कर दिया है. साथ ही खुद दूसरी शादी कर पहली पत्नी पर तीन लाख रुपये का जुर्माना भी सुनाया है. जिसके बाद पीड़िता इंसाफ के लिए थानों के चक्कर लगा रही है.
इतने में भी उसके मन नहीं भरा तो क्योंकि उसने अपने गर्भ से बेटे के बजाय, बेटी को जन्म देने का अपराध किया है. इस रंजिश से नाराज मनमाफिक दहेज नहीं मिलने और शादी के बाद बेटी के जन्म से बौखलाए पति सरफराज खान ने ना केवल दूसरी शादी कर ली, बल्कि ससुराल वापस आने के लिए तीन लाख का जुर्माना तक लगा दिया है.
न्याय की आस में पीड़िता दर दर भटकने पर मजबूर है. शबनम की शादी साल 2015 में मुस्लिम रीति रिवाज के साथ चतरा निवासी सरफराज खान के साथ हुई थी. शबनम के हाथों की मेंहदी का रंग फीका भी नहीं हुआ था कि ससुराल वालों ने दहेज के लिए प्रताड़ित करना शुरू कर दिया. समय के साथ साथ शबनम एक बेटी की मां बन गई.
बेटी के जन्म के बाद पति सरफराज बौखला गए, उसने ना केवल परिवार नियोजन करवा दिया, बल्कि ससुराल वापस आने के लिए तीन लाख का जुर्माना लगाकर शबनम को बेघर कर दिया. शबनम ने इसकी शिकायत महिला थाना में कराई है, लेकिन 4 साल बीत जाने के बाद भी शबनम इंसाफ के लिए दर-दर भटक रही है. महिला थाना से शबनम को अब तक कोई मदद नहीं मिल पाई है. जब मामले को लेकर महिला थाना प्रभारी से पूछे जाने पर उन्होंने कैमरा के सामने कुछ भी बोलने से इंकार कर दी.
हालांकि, कैमरे से हटकर उन्होंने बताया कि मामला मेरे संज्ञान में नहीं अब आ गया है, जल्द ही आरोपी पति को गिरफ्तार किया जाएगा. अब देखना होगा की सरफराज की कब तक गिरफ्तारी होती है और कब इंसाफ के लिए भटक रही शबनम को न्याय मिलती है.

