नीता शेखर,
रांची: समाज बदल रहा है. लोग कहते हैं समाज बदल रहा है, यह तो बहुत ही अच्छी बात है कि सब बदल रहे हैं. आज बेटियां भी बदल रही है. आज मां बाप के ख्यालात भी बदल रहे हैं. कहते हैं आज लड़का लड़की में कोई फर्क नहीं है आज की बेटियां अपने पैरों पर खड़ी हो चुकी हैं. आज हर मां-बाप यही चाहता है कि हमारी बेटी आर्थिक रूप से मजबूत बने ताकि भविष्य में उन्हें कोई दिक्कत ना हो. यह सत्य भी है कि आज बेटियां पढ़ लिखकर ऊंचे ऊंचे पदों पर पहुंच गई है. अपना नाम भी रोशन कर रही हैं.
अब वह जमाना नहीं रहा कि लड़के ही मां-बाप का नाम रोशन कर सकते हैं बल्कि बेटियां भी अपने मां-बाप का नाम रोशन कर रही हैं. आज कोई भी क्षेत्र अछूता नहीं है जहां बेटियां काम नहीं कर रही हो. चाहे सरहद का किनारा हो, चाहे आकाश में प्लेन उड़ाना हो, चाहे स्पेस में काम करना हो,आज हर क्षेत्र में बेटियां काम कर रही है. कठिन से कठिन काम भी आज की बेटियां कर रही है.
आज की बेटियां आधुनिक तरीके से नौकरी करते हुए अपने घरों को भी संभाल रही है. आज की बेटियां बोझ बनना नहीं बल्कि बोझ उठाना जानती है. आज के युग में बेटियां अपने आप को सशक्त बनाना जान रही है. और साथ ही साथ अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेवारी भी संभाल रही हैं.
मुझे एक घटना याद आ रही है, मेरी एक दोस्त काफी आधुनिक विचार की थी, उसने एमबीए किया और एक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी शुरू की ,उसके कुछ ही दिन बाद उसके मां-बाप ने डॉक्टर लड़के से शादी कर दी, जो अमेरिका में नौकरी करता था. बहुत ही धूमधाम से शादी हुई. शक्ति को नए माहौल में थोड़ा डर भी लग रहा था. पता नहीं वह कैसे तालमेल मिला पाएगी. यही सोचते हुए उसे नींद आ गई. सुबह जब उसकी आंख खुली तो उसने देखा उसका पति कहीं दिखाई नहीं दे रहा था. घर में चारों तरफ शांति छाई हुई थी ,लग ही नहीं रहा था, यह शादी का घर है, उसे कोई नजर नहीं आ रहा था तभी उसकी नजर एक छोटी सी बच्ची पर पड़ी उसने बड़े प्यार से उसे अपने पास बुलाया और पूछा चाचू कहां है? चाचू तो अमेरिका चले गए. क्या ? शक्ति इतना सुनते ही बेहोश होकर गिर गई और जब उसकी आंख खुली तो उसने देखा वह एक हॉस्पिटल में थी, सभी उसके आसपास बैठे हुए थे. नहीं था तो उसका पति, शक्ति को होश में आया देखकर उसके साथ ससुर ने कहा बेटी हमें नहीं पता था. अगर हमे हमें पता होता तो हम यह शादी कभी नहीं करते. बस उसने जाते वक्त उसने यही कहा तुम्हें बहू चाहिए थी, मैंने ला दी है. इतना कहकर वह चला गया.
शक्ति के आंसू झर झर बह रहे थे, शक्ति ने अपने मन को मजबूत किया और झट से अपनी आंखों के आंसू को पोछ लिया और मन को मजबूत करते हुए कहा अरे जिस व्यक्ति को मेरी जरूरत नहीं उसके लिए आंसू क्यों बहाना. उसने अपने सास ससुर को देखा और कहा आज से मैं आपकी बहू नहीं बेटी हूं. चलिए हम सब घर चलते हैं. उसने बेटी बनकर बड़े प्यार से उस परिवार को संभाल लिया. उसने अपने मां-बाप की तरह उनकी सेवा की, उसके सास ससुर ने अपने छोटे बेटे के साथ उसकी शादी कर दी जो किसी कॉलेज में प्रोफेसर है. आज शक्ति ने अपने साथ साथ पूरे परिवार और समाज को संभाल लिया हैं. आज की बेटियां इतनी ताकतवर हो गई हैं कि मरने के बाद अपने मां-बाप का क्रिया कर्म भी कर लेती है इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि “नारी तुम तुम गर्व हो तुम सशक्त हो, जरूरत पड़े तो तुम दुर्गा और काली भी हो.”
आज की बेटियां “मौसम की बहार है. अपने माता-पिता की गौरव है. इस दुनिया की नींव है, आज की बेटियां किसी की मोहताज नहीं है.”…………..


