ब्यूरो चीफ
रांची: झारखंड में प्याज की कीमतें अब लोगों को रूलाने लगी हैं. राजधानी रांची की मंडियों में प्याज की खुदरा कीमतें सोमवार को 65 रुपये तक पहुंच गयीं. एक सप्ताह में प्याज की कीमतें 30 रुपये से अधिक बढ़ी है. प्याज की कीमतें कहां थमेंगी, यह किसी को पता नहीं है. प्याज के थोक विक्रेताओं का कहना है कि नासिक मंडी में ही प्याज 50 रुपये के भाव से बिक रही है, जिसकी वजह से रांची पहुंचते-पहुंचते प्याज महंगा हो जा रहा है. थोक विक्रेताओं के अनुसार महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, गुजरात, पूर्वी राजस्थान, पश्चिमी बंगाल में अत्यधिक बारिश से प्याज की फसल प्रभावित हुई है. फिलहाल कोल्ड स्टोर के प्याज से ही बाजार की जरूरतें पूरी की जा रही हैं.
रांची में 10 से 13 ट्रक आता है प्याज
रांची की थोक मंडियों में 10 से 13 ट्रक प्याज प्रति दिन आता है. रांची में ही प्याज की खपत तीन टन से अधिक है. राजधानी में प्याज की खेप डेली मार्केट और पंडरा बाजार पहुंचती है. यहीं से विभिन्न मंडियों में प्याज भेजा जाता है. प्याज के थोक और खुदरा भाव में 10 रुपये प्रति किलो का अंतर भी आता है. खुदरा विक्रेताओं के अनुसार मंडी तक प्याज लाने में 5 रुपये प्रति किलो का खर्च पड़ता है, इसलिए बाजारों में प्याज महंगा बिकता है.
गड़बड़ा गया किचन का बजट
प्याज की बढ़ती कीमतों ने किचन का बजट गडबड़ा दिया है. प्याज की कीमतें बढ़ने से घर में बननेवाली सब्जियों में प्याज कम पड़ रहा है. यहां तक की खोंमचे, ढेलेवाले अब प्याज की जगह मूली का इस्तेमाल करने लगे हैं. बड़े रेस्तरां में भी प्याज के विकल्प पर काम होने लगा है.
राज्य सरकार कीमतों पर नहीं लगा पा रही अंकुश
राज्य सरकार प्याज की बढ़ती कीमतों पर अंकुश नहीं लगा पा रही है. अब तक खाद्य, सार्वजनिक वितरण और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की तरफ से प्याज की बढ़ती कीमतों को लेकर किसी तरह का निर्देश भी जारी नहीं किया गया है. पहले प्याज की बढ़ती कीमतों पर आलू प्याज थोक विक्रेता संघ और चैंबर से प्याज के मूल्य नियंत्रित रखने की एडवाइजरी जारी की गयी थी. यहां बताते चलें कि असम सरकार ने प्याज के मूल्य पर काबू रखने का निर्देश जारी किया है.

