रांची : भाकपा-माले झारखंड राज्य कमेटी की बैठक जूम ऐप के माध्यम से बुधवार को आयोजित की गई. बैठक में पार्टी महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य भी मौजूद थे. दीपंकर भट्टाचार्य ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि देश संकट से गुजर रहा है. कोरोना महामारी से निपटने में भाजपा सरकार पूरी तरह से विफल रही है. अनप्लान्ड लॉकडाउन से प्रभावित जनता की समस्यायों को हल करने के बदले सरकार ने हर केंद्रीय संस्थानों का भगवाकरण करने की मुहिम चला रखी है. देश की संपदा और सार्वजनिक क्षेत्र बेच दिया जा रहा है. संविधान को नजरंदाज कर मनमानी तरीके से फैसला लिया जा रहा है. संविधान और लोकतंत्र पर चौतरफा हमला किया जा रहा है. समाज संकट से घिर गया है.
राजनीतिक विरोधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और छात्र यूवाओं को फर्जी मुकदमे में फंसाकर जेल दिया जा रहा है. सोशल मीडिया को भी घृणा फैलाकर समुदाय विशेष के खिलाफ भड़कानेवाला माध्यम बना दिया गया है. कफील खान जैसे डाक्टर को भी दमन का शिकार बनाया जा रहा है. प्रशांत भूषण जैसे वकील को कोर्ट की आलोचना करने पर भी सजा दी जा रही है. न्यायपालिका भी जनता की अपेक्षा से परे संघी सत्ता का औजार बन गई है. केंद्र सरकार कोरोना से निपटने में बिल्कुल नाकाम रही है. आज संविधान और लोकतंत्र की रक्षा करने की जिम्मेदारी लाल झंडा के ही कंधे पर आ चुकी है.उन्होंने जन आंदोलन की ताकत से संघी सत्ता की तानाशाही का मुकाबला करते हुए झारखंड में पार्टी को क्रांतिकारी विपक्ष की मुखर आवाज व प्रमुख पार्टी के रूप में सामने लाने का आह्वान किया.
बैठक में पार्टी को वैचारिक राजनीतिक रूप से मजबूत पार्टी बनाने की योजना बनाई गई. 27 अगस्त को जनमुद्दों पर हर प्रखंड में घेराव प्रर्दशन करने का निर्णय लिया गया. इन मुद्दों में प्रमुख हैं-हर गरीब परिवार को 50 किलो अनाज मुहैया कराने, तमाम गैर टैक्स पेयर्स को हर माह 10 हजार रुपए भत्ता देने, गैर मजरुआ-सरकारी जमीनें गरीबों को मुहैया कराने, स्वयं सहायता समूहों समेत तमाम छोटे कारोबारियों-किसानों-छात्रों का लोन माफ करने, तमाम कोविड-19 के मरीजों का मुफ्त इलाज कराने, आदि मांगें शामिल हैं. इन सवालों पर धारावाहिक आंदोलन विकसित किया जाएगा.
बैठक की अध्यक्षता राज्य सचिव जनार्दन प्रसाद ने की, जबकि बैठक में शामिल लोगों में प्रमुख रूप से विधायक विनोद सिंह, पूर्व विधायक राजकुमार यादव, केंद्रीय कमेटी सदस्य मनोज भक्त, शुभेंदु सेन, गीता मंडल, राज्य स्थाई कमेटी सदस्य मोहन दत्ता, सीताराम सिंह, परमेश्वर महतो, उस्मान अंसारी, देवकीनंदन बेदिया, भुनेश्वर केवट, सुषमा मेहता, कालीचरण मेहता, आरएन सिंह, गौतम मुंडा, अनिल अंशुमन, रामेश्वर चौधरी, जयंती चौधरी, अशोक पासवान, राजेश यादव, पूरन महतो, पूनम महतो, कृष्णा सिंह, नागेंद्र सिंह, देवदीप सिंह दिवाकर, जेएन सिंह, भुनेश्वर बेदिया, बैजनाथ मिस्त्री, कौशल्या देवी, सहदेव यादव, आदि शामिल थे.

