रांची: झारखंड अद्भुत परंपरा और विरासत का धनी है. यहां पहाड़, जंगल और खूबसूरत झीलों के साथ प्रकृति अपना मनमोहक रूप दिखाती है. यूं तो इस राज्य की कई खासियतें है, पर यहां का पारंपरिक भोजन हमेशा लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है. यहां के लोग खाने और खिलाने के शौकीन हैं. चाहे पीठा हो या धुस्का. यहां के हर व्यंजन का स्वाद लोगों को दीवाना बना सकता है.
यहां के मूल निवासी ज्यादातर, चावल और उससे बने व्यंजन खाना पसंद करते हैं. यहां कई तरह के साग भी चाव से खाए जाते हैं, जो स्वादिष्ट होने के साथ-साथ सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद होते हैं.
ये हैं कुछ प्रसिद्ध व्यंजन :-
रूगड़ा: रुगड़ा झारखंड का पारंपरिक खाद्य है. यह मशरुम प्रजाति का होता है, जो मूल रूप से झारखंड में ही उगता है. इसे पुटू और खुखड़ी के नाम से भी जाना जाता है. बारिश के मौसम में बिजली गिरने की वजह से जंगलों में दरार पड़ जाती है, इन्हीं जमीन के दरारों में रूगड़ा पनपता है. इसके बाद ग्रामीण इन्हें इकट्ठा कर लोगों को बेचते हैं. सावन-भादो में कई जगह पर ग्रामीण महिलाएं सड़क किनारे इन्हें बेचती दिख जाती हैं.
इसे खाने के शौकीन इसे ‘वेज मीट’ भी कहते है, क्योंकि रूगड़ा खाने में बेहद स्वादिष्ट होता हैं. इसमें कई स्वास्थ संबंधी गुण भी हैं. रूगड़ा, ब्लड प्रेशर, एनीमिया और दिल की मरीजों के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है.
साग: स्थानीय लोग भिन्न-भिन्न प्रकार के साग को बेहद पसंद करते है. यह ना सिर्फ स्वाद में बेहतरीन होते हैं, बल्कि सेहत के लिहाज से भी बहुत गुणकारी होते है. यहां पर चना, खेसारी, मेथी और बथुआ आदि के पत्तों को चाव से खाया जाता है.
खेसारी साग ठंड के महीने में खाया जाता है, क्योंकि इसकी तासीर गर्म होती है. इनके पत्तों को उबालने के बाद इसमें नमक और हरी मिर्च मिलाकर इसकी चटनी तैयार की जाती है. फिर इसे भात के साथ चटकारे लेकर खाया जाता है.
इसी प्रकार बथुआ का साग सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है. इससे पथरी, पेट में कीड़े या कब्ज की शिकायत से छुटकारा मिल सकता है. झारखंड में करीब 50 तरह के साग पाए जाते हैं.
ठेकुआ : ठेकुआ यहां का एक पारंपरिक व्यंजन है. यह चावल व गेहूं के आटे और गुड़ के मिश्रण से तैयार किया जाता है. इसके बाद इसे घी में तला जाता है. इसकी खुशबू दूर से ही लोगों को आकर्षित करती है. यह खाने में भी बहुत स्वादिष्ट होते हैं.
धुस्का : धुस्का झारखंड का पारंपरिक व्यंजन है. यहां के लोग त्योहारों या किसी खास दिन पर इसे जरूर खाते हैं. इसे चावल और दाल को पीसकर तैयार किया जाता है. यह नमकीन स्नैक्स और इसका कुरकुरापन लोगो को बहुत पसंद आता है. शाम के वक्त ज्यादातर लोग नाश्ते में हरे धनिये की चटनी के साथ धुस्का खाते हैं.
हड़िया: हड़िया झारखंड का पारंपरिक नशीला पेय है. यहां के निवासी त्योहारों के मौके पर इसे तैयार करते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में यह ज्यादातर सड़क किनारे बिकता दिखाई देता है. हड़िया को देशी शराब या राइस बियर भी कहते हैं.
इसे बनाने के लिए उबले हुए चावल को कुछ जड़ी बूटियों के साथ मिलाकर 5, 6 दिनों के लिए किसी बर्तन में छोड़ दिया जाता है. यह भात के फर्मेंटेशन से तैयार हो जाता है. इसके बाद लोग आनंद लेकर इसका सेवन करते हैं.
तो यह हैं झारखंड के कुछ पारंपरिक खाद्य. यहां आने वाले सैलानियों और पर्यटकों को एक बार इन्हें जरूर चखना चाहिए.

