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राज्य एवं केंद्र सरकार से आदिवासियों के लिए आदिवासी धर्म कोड की मांग

by bnnbharat.com
October 4, 2020
in समाचार
राज्य एवं केंद्र सरकार से आदिवासियों के लिए आदिवासी धर्म कोड की मांग
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रांचीः आदिवासी धर्म समन्वय समिति झारखंड की बैठक रविवार को बिहार विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष देवेन्द्रनाथ चम्पिया की अध्यक्षता में रांची प्रेस क्लब, करम टोली चौक रांची में हुई. इस बैठक में झारखंड के सभी बड़े आदिवासी समुदाय संथाल, उरांव, मुंडा हो इत्यादि के प्रतिनिधि शामिल हुए.

इस बैठक में कहा गया कि दिल्ली में दिनांक 6 अक्टूबर 2015 को आदिवासी सरना महासभा के केंद्रीय कमिटी के मुख्य संयोजक देवकुमार धान के नेतृत्व में सरना धर्म कोड 2021 के जनगणना प्रपत्र में लागू करने हेतु धरना प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री को पत्र दिया गया था.

उस पत्र के जवाब में दिनांक 20-11-2015 को भारत सरकार गृहमंत्रालय भारत के जनगणना महारजिस्ट्रार के कार्यालय से पत्र आया, जिसमें कहा गया कि 2001 के जनगणना में पूरे देश में 100 से अधिक जनजाति धर्मों की जानकारी मिली थी, जिसमें देश के प्रमुख जनजाति धर्म सरना (झारखंड), सनामही (मणिपुर), डोनिपोलो (अरुणाचल प्रदेश), गोंडी, भीली, आदि, आदिवासी इत्यादि थे.

इसलिए इनमें से प्रत्येक जनजाति धर्म को पृथक कोड संख्या उपलब्ध कराना व्यवहारिक रूप से संभव नहीं है. उपयुक्त विवरण को ध्यान में रखते हुए जनजाति धर्म के रूप में सरना के लिए पृथक धर्म कोड का आवंटन संबंधी मांग स्वीकार नहीं है.

गृहमंत्रालय के पत्र मिलने के बाद देश के 15 राज्यों के भील, गोंड, संथाल, मीणा, उरांव, मुंडा हो इत्यादि बड़े आदिवासी समुदायों के बीच धर्म कोड हेतु काफी चिंतन मनन एवं अध्ययन करने के बाद देश के सभी आदिवासी समुदाय इस निर्णय पर पहुंचे कि भारत के प्रथम जनगणना 1871 से 1951 तक के जनगणना प्रपत्र में आदिवासियों के लिए आदिवासी धर्म कोड था, जिसे वर्ष 1961 में एक साजिश के तहत हटा दिया गया इसलिए पुनः आदिवासी धर्म कोड को जनगणना प्रपत्र में लागू किया जाये.

दिनांक 9-9-2018 को भील, गोंड, संथाल, मीणा, उरांव, मुंडा हो इत्यादि बड़े आदिवासी समुदाय की राष्ट्रीय स्तर की बैठक गुजरात में हुई. उसके बाद फिर राष्ट्रीय स्तर की बैठक अंडमान निकोबार में हुई.

इन सभी बैठकों में सभी आदिवासी समुदाय द्वारा यह बात प्रमुखता से कही गई कि सरना एक पूजा स्थल है और पूजा स्थल धर्म का नाम नहीं हो सकता है, धर्म समुदाय के नाम पर होता है पूरे दुनिया में धर्म समुदाय के नाम पर है इसलिए उस राष्ट्रीय स्तर की बैठक में सभी आदिवासी समुदाय के बीच आदिवासी धर्म पर सहमति बनी.

बैठक में कहा गया कि चूंकि राष्ट्रीय स्तर पर सभी आदिवासी समुदायों के बीच आदिवासी धर्म कोड पर सहमति बनी है, इसलिए हमसभी झारखंड के आदिवासी आदिवासी धर्म कोड पर सहमति प्रदान करते हैं तथा राज्य एवं केंद्र सरकार से आदिवासियों के लिए आदिवासी धर्म कोड की मांग करते है.

क्षेत्रीय धर्म का नाम भी अस्तित्व में रहे इसलिए झारखंड में आदिवासी (सरना)धर्म, आदिवासी(सारी) धर्म, आदिवासी (बिदिन) धर्म लिखने हेतु इस बैठक में विचार विमर्श किया गया.

इस बैठक में मुख्य रूप से रामचंद्र मुर्मू, बाबूलाल हेम्ब्रोम, लालदेव सोरेन, दशरथ हांसदा, कालीचरण बिरुवा, चन्दन होनहागा, लीला मुंडा, छूनकु मुंडा, दुर्गावती ओडया, मनोनीत हस्सा पूर्ति, जयमंगल मुंडा, गुडवमुंडा, दिनु उरांव, प्रभुदयाल उरांव, तेतर उरांव, दिनेश उरांव, रजनीश उरांव, मक्का उरांव, दहरु उरांव, सुखलाल उरांव, मोहना उरांव, पूना उरांव, चरवा उरांव, दिनेश उरांव, राजू उरांव उपस्थित थे.

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