रांची: विधानसभा सदस्यों ने विधायक निधि की राशि 4 करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ करने की मांग की. शून्य काल में उमाशंकर अकेला, जय प्रकाश भाई पटेल, किशुन दास, मथुरा महतो, अम्बा प्रसाद, अपर्णा सेन, इंद्रजीत महतो, केदार हाजरा, बिरंची नारायण, अमित यादव, लंबोदर महतो, अनंत ओझा, आलोक चौरसिया, नारायण दास व नमन विल्सन ने भी एक स्वर में विधायक निधि बढ़ाने की मांग की. वहीं, विधायक शशिभूषण मेहता ने विधायक निधि 4 करोड़ से बढ़ाकर 15 करोड़ करने की मांग की.
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पिछली सरकार ने पारा शिक्षकों पर लाठी चलायी, हमलोग नहीं चलायेंगे
पारा शिक्षकों के नियमितिकरण और स्थायीकरण के मामले पर सदन में जम कर बहस हुई. ध्यानाकर्षण में विधायक सुदेश महतो द्वारा पूछे गये इस सवाल के जवाब में मंत्री जगरनाथ महतो ने कहा कि पारा शिक्षक मामले में सरकार पूरी तरह से गंभीर है. जितनी जल्दीे हो सके इस पर सरकार निर्णय लेगी. मंत्री महतो ने कहा कि पिछली सरकार ने तो पारा शिक्षकों पर लाठी बरसायी थी, लेकिन हमारी सरकार ऐसा नहीं करेगी.
सरकार नियमावली बना रही है उसके अनुरूप पारा शिक्षकों की मांगें पूरी की जायेंगी. उन्हों ने कहा कि हेमंत सरकार का आत्मविश्वास पूरी तरह से जगा हुआ है. हालांकि, सुदेश महतो उनकी जवाब से संतुष्टन नहीं हुए. उन्होंने कहा कि मैं सरकार से पूछ रहा हूं कि पारा शिक्षकों को कब तक नियमितिकरण की प्रक्रिया की जायेगी. इस पर सदन में मौजूद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि सरकार प्रशासनिक सुधार आयोग बना चुकी है. पारा शिक्षकों के संदर्भ में अनुशंसा आयेगा तो सरकार काम करेगा.
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गलत जवाब देने वाले पदाधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए
विधायक राज सिन्हा ने जल संसाधन से जुड़े मामलों को उठाया. लेकिन उनके सवाल पर सरकार का गोल-मटोल जवाब रहा. जिसपर सदन में खूब बहस हुई. विधायक राज सिन्हा सरकार के जवाब से संतुष्ट नहीं दिखे. उन्होंने कहा कि इस तरह से गलत जवाब देने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. इस पर संसदीय कार्य मंत्री आलमगीर आलम ने कहा कि उन्होंने अधिकारी को हिदायत दे दी है. उन्होंने माना कि अधिकारी की ओर से जो जवाब दिया गया है, वो गलत है. उन्होंने सदन को बताया कि संबंधित अधिकारी से कह दिया गया है कि भविष्य में इस प्रकार की गलती बर्दाश्त नहीं. उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि अभियंताओं के स्वीककृत बलों को जल्द भरा जायेगा. दो माह के अंदर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी जायेगी.
बिजली उपलब्ध कराने को लेकर सदन में हुई जम कर किच-किच
विधायक डॉ. लंबोदर महतो ने बिजली उपलब्ध कराने के सवाल पर जम कर किच-किच हुई. डॉ. महतो ने कहा कि डीवीसी आज भी छह घंटे से अधिक बिजली की कटौती की जा रही है. पैसा हमारा, संसाधन भी हमारी और हम अंधेरे में रहें. उन्होंने विभागीय मंत्री से जानना चाहा कि सरकार राज्यर में अब तक बिजली पर कितनी राशि खर्च कर चुकी है. उन्होंने सरकार द्वारा दिये गये जवाब को सदन को भरमाने वाला बताया. सरकार ने अपने जवाब में बताया कि जेवीएनएल की मांग लगभग 2100 मेगावाट की है लेकिन, बिजली की मांग 4000 मेगावाट है.
सरकार के इस जवाब पर निर्दलीय विधायक सरयू राय ने भी एतराज जताया. इस तरह का जवाब तो सदन को गुमराह करने वाली है. जवाब ऐसा होना चाहिए जिससे पूरा सदन संतुष्ट हो. सरयू राय ने विभाग के जवाब को भ्रामक बताया. संसदीय कार्य मंत्री आलमगीर आलम ने माना कि जवाब लिखने में विभाग से गलती हुई है तभी विधायक प्रदीप यादव ने कहा कि जो जवाब बनता है उस पर मंत्री की भी तो हस्ताक्षर होती है उसके बाद ही सदन के पटल पर रखा जाता है. इस पर आलमगीर आलम ने कहा कि मिथिलेश ठाकुर बीमार हैं अस्पताल में भर्ती हैं.
यह सरकार ‘कोई टिप्पोणी नहीं’ पर इतिहास बना रही है क्या?
सवालों के जवाब ऐसे हों जिससे सवाल पूछने वाला संतुष्ट हो. लेकिन, इस सरकार में तो सवालों के सामने कोई टिप्पंणी नहीं लिखकर अपने कार्यों की इतिश्री मान ले रही है. यह कहना है विधायक सीपी सिंह का सवालों के सामने कोई टिप्पणी नहीं लिखे होने से सीपी सिंह ने एतराज जताते हुए कहा कि सरकार ‘कोई टिप्पेणी नहीं’ पर नया इतिहास बनाना चाहती है क्या ? इस तरह का जवाब नहीं दिया जाना चाहिए.

