रांचीः नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री सीपी सिंह ने कहा है कि हमारा राज्य युवा है. यहां आधारभूत संरचना उपलब्ध कराकर आम शहरी नागरिकों को सुविधायें उपलब्ध करानी है. इसके लिए राशि एवं निधि की जरूरत है. इसे ध्यान में रख कर विश्वबैंक से ऋण लिया जा रहा है. ऋण की राशि का सही समय पर और सही सदुपयोग हो तभी ऋण लेना सार्थक होगा. सही समय से इस राशि से काम होगा तो ब्याज का बोझ राज्य सरकार पर अधिक नहीं पड़ेगा. सीपी सिंह सोमवार को प्रोजेक्ट भवन में आयोजित कार्यशाला में बोल रहे थे. कार्याशाला का आयोजन झारखंड म्यूनिसपल डेवलपमेंट प्रोजेक्ट, नगर विकास विभाग एवं विश्वबैंक द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया.
निर्माण के दौरान निगरानी जरूरी
सीपी सिंह ने कहा परियोजनाओं से संबंधित विस्तृत कार्य प्रतिवेदन बनाने वाली परामर्शी कंपनियां परियोजना स्थल पर जाकर सर्वे करें. इसके बाद विस्तृत कार्य प्रतिवेदन बनायें. स्मार्ट रोड बनना चाहिए, उसके निर्माण के दौरान निगरानी आवश्यक है. गुणवत्ता के साथ सड़क बने ताकि देखने में भी सुंदर लगे. झारखंड सरकार वर्तमान समय में काफी विकास कार्य कर रही है. इसमें सबके सहयोग की जरूरत है.
झारखंड विकसित राज्यों की तुलना में अब भी पीछेः अजय
नगर विकास सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि जुडको बड़ी-बड़ी परियोजनाओं का कार्यान्वयन कर रहा है. काम हो रहा है लेकिन अभी भी झारखंड अन्य विकसित राज्यों की तुलना में काफी पीछे है. शहरी नागरिको तक सुविधायें पहुचाने के लिए बड़ी धनराशि की आवश्यकता है. सड़क, सिवरेज-ड्रेनेज और शहरी पेयजलापूर्ति के लिए लगभग 1300 करोड़ की जरूरत है. इतनी बड़ी राशि राज्य सरकार अपने बजट में नहीं उपलब्ध करा सकती. केंद्र सरकार की योजनाओं के संचालन के लिए भी राशि सीमित है. इसी वजह से विश्व बैंक से सहायता ली गयी. राज्य एशियन डेवलपमेंट बैंक की सहयता से भी परियोजनाओं को क्रियान्वयन किया जा रहा है.
बेहतर होगा धनबाद में बनने वाला स्मार्ट रोड
नगर विकास सचिव ने कहा कि धनबाद में बनने वाला स्मार्ट रोड बेहतर होगा. विकसित राज्यों की सुविधा झारखंड में भी उपलब्ध कराना चाहते हैं. उम्मीद है स्मार्ट रोड विकसित देशों के अनुरुप बने. रोड ऐसी बनायें कि झारखंड ही नहीं बल्कि दूसरे राज्य के लोग आकर देखें कि सड़क बनी है. विश्वबैंक को 100 से अधिक देशों में काम करने का अनुभव है. इसका लाभ झारखंड को मिलेगा. नगर निकायों में पदाधिकारियों एवं कर्मारियों में क्षमता एवं कौशल विकास का भी काम होगा. कम से कम राज्य के सात नगर निगम अपनी आर्थिक सुदृढ करें ताकि छोटे कामों के लिए राज्य सरकार से मदद नहीं लेनी पड़े. परियोजनाओं का कार्य इंजीनियरिंग प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रशन प्रणाली पर ही कराया जाये.
विश्व बैंक ने 1470 करोड़ रुपए की परियोजनाओं की दी है स्वीकृतिः अमित
राज्य नगरीय विकास प्राधिकार के निदेशक अमित कुमार ने विश्व बैंक प्रोजेक्ट से संबंधित विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने कहा कि राज्य के नगरों में आधारभूत संरचना के विकास के लिए विश्वबैंक 1470 करोड़ रूपये की परियोजनाओं की स्वीकृति दी है. इसमें विश्व बैंक 1029 करोड़ रूपये का ऋण अंशदान के रूप उपलब्ध करा रहा है, जबकि राज्य सरकार 341 करोड़ रुपये का हिस्सा पूंजी लगायेगी. इस राशि से नगरों में सड़क, सिवरेज-ड्रेनेज और पेयजलापूर्ति से संबंधित आधारभूत संरचना का विकास किया जायेगा. उन्होंने बताया कि वर्तमान में विश्वबैंक की सहायता से खूंटी में पेयजलापूर्ति योजना का क्रियान्वयन कराया जा रहा है. इस परियोजना की लागत लगभग 72 करोड़ है. इसी प्रकार धनबाद में 20 किलोमीटर की दो स्मार्ट सड़के बनवायी जा रही है. 25 अक्तूबर 2018 को यह परियोजना शुरू हुई है. सात वर्ष की ऋण की अवधि है.
विश्वबैंक की वशुधा थावकर ने कहा कि विश्वबैंक ऋण उपलब्ध कराने के साथ ही उसके सही उपयोग के लिए निकायों के पदाधिकारियों एवं अभियंताओं का क्षमता एवं कौशल विकास करने का भी काम करेगा. इंफ्रा एंड पब्लिक फाइनांस के निदेशक आंनद महादेवन ने नगर निकायों को वाणिज्यिक आत्म निर्भरता के लिए आगे बढ़ने का आहवान किया.


