जमशेदपुर: जहाँ एक ओर इंडिया में विकास की बातें होती है , डिजिटल इंडिया पर जोर दिया जाता है, एक खूबसूरत भारत की तस्वीर हमारी आँखों के सामने रखी जाती है , वही एक हकीकत इन सब से परे है. बदलते हिंदुस्तान के बदलते झारखंड की ये भी एक सच्चाई है. वैसे यह तस्वीर तब और विचलित करनेवाली है जब आप ये जानेंगे कि ये तस्वीर है कहां की.
जी हां ये तस्वीर है झारखंड का फाइनेंशियल कैपिटल की यानि जमशेदपुर शहर की. जहां पेट की आग बुझाने के लिए यह व्यक्ति जूठन खाने को विवश है. इस तस्वीर में जूठन खा रहा व्यक्ति पहले तो हमें विक्षिप्त लगा मगर कैमरा से सामना होते ही वह उठ खड़ा हुआ .
यह व्यक्ति बोलता भी है और पूरी तरह से सामान्य भी है. खोमचे वाले जहां जूठन फेंक आए. उसी जगह पर जूठन की ज्यादा मात्रा देख यह व्यक्ति जुठन खाकर अपने पेट की आग बुझाने पहुंच गया.
स्वाभिमान इतना कि मिडिया कर्मी उसे कुछ खिलाने के लिए ऑफर देते रहे मगर यह व्यक्ति चलता बना. वैसे लौहनगरी जमशेदपुर में ऐसे भूखों की लंबी फेहरिस्त आपको देखने को मिल जाएगी. जहां अहले सुबह सैकड़ों की तादाद में बच्चे और उनके परिजन लोगों के जूठन खाकर अपना पेट भरने को मजबूर हैं.
अब सवाल यह उठता है कि आखिर बदलते भारत का यह दृश्य समाज के उन रहनुमाओं और ठेकेदारों तक क्यों नहीं पहुंचती. वैसे बदलते भारत की यह एक कड़वी सच्चाई है जिसे पचा पाना सबके वश की बात नहीं.

