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विस्थापन आयोग का होगा गठन

by bnnbharat.com
March 12, 2020
in Uncategorized
विस्थापन आयोग का होगा गठन

विस्थापन आयोग का होगा गठन

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रांची: राज्य में विस्थापन आयोग का गठन किया जायेगा, ताकि विस्थापितों की समस्याओं का निराकरण हो सके. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गुरुवार को सदन में इसकी घोषणा की. मुख्यमंत्री, बोकारो के विधायक बिरंची नारायण के सवाल के जवाब दे रहे थे.

सदन की कार्यवाही के दौरान विधायक बिरंची ने बोकारो स्टील प्लांट में मुआवजा का मामला उठाया. उन्होंने कहा कि बोकारो स्टीेल प्लांट में 7000 परिवारों को आज तक नौकरी नहीं मिल पायी. 5000 परिवारों का पुनर्वास भी नहीं हुआ और न ही मुआवजा मिला.

इस पर भू-राजस्व मंत्री जगरनाथ महतो ने कहा कि यह काफी पुरानी मांग है, सरकार इस दिशा में तत्काल निर्णय लेगी. सरकार इसपर पूरी तरह से गंभीर है. विस्थापितों को उनका अधिकार जरूर मिलेगा. बिरंची ने कहा कि क्या सरकार उन रैयतों को उसकी जमीन वापस करेगी? क्योंकि, यह मामला पांच साल से अधिक हो चुका है.

सरकार ने कहा है कि पांच साल तक जमीन का उपयोग नहीं की जाती है तो वो जमीन रैयत को वापस कर दी जायेगी. इस पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि पांच साल किस तरह से सरकार चली यह सभी को स्पष्ट है. उन्होंने घोषणा पत्र का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार राज्य में विस्थापन आयोग का गठन किया जायेगा. विस्थापितों को उनका अधिकार मिलेगा.

आरक्षण नियमावली बनायेगी सरकार

विधायक प्रदीप यादव ने जेपीएससी आदिवासियों, पिछड़ों व दलितों को आरक्षण न दिये जाने का मामला सदन में उठाया. उन्होंने कहा कि आदिवासियों, पिछड़ों व दलितों को प्रारंभिक परीक्षा में आरक्षण नहीं मिलता है. जिससे वैसे छात्र जो आरक्षण कोटि में आते हैं उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है. श्री यादव ने कहा कि सरकार ने आरक्षण नीति अब तक नहीं बनायी है. बिहार की नियमावली से ही काम चल रहा है. नियमावली में केवल बिहार की जगह झारखंड, पटना की जगह रांची कर दिया गया है जबकि,बिहार में आरक्षण नियमावली का पालन भी हो रहा है.

इस पर मुख्यनमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य सरकार जल्द ही आरक्षण नियमावली बनायेगी. किसी भी परीक्षार्थियों को उनके अधिकार से वंचित नहीं होने दिया जायेगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि अलग राज्य बनने के बाद जेपीएससी की जितनी भी परीक्षाएं हुईं हैं वो सभी विवादों में घिर गयी है, जो राज्य की कार्यप्रणाली के लिए भी चिंता की बात है. अभी सातवीं जेपीएससी की प्रक्रिया चल रही है. उन्होंने कहा कि जेपीएससी एक स्वतंत्र एजेंसी है, सरकार को उसकी कार्यप्रणाली में हस्तक्षेप नहीं करनी चाहिए. सरकार के सीधे हस्तक्षेप से कई चीजें खराब हुई है. सरकार अपने दायरे को बगैर समझे काम किया, जिसका खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ा.

विनोद सिंह ने बगोदर रैयतों को मुआवजा न मिलने का मामला उठाया

माले विधायक विनोद सिंह ने सदन में बगोदर में रैयतों को अब तक मुआवजा न मिलने का मामला उठाया. उन्होंने कहा कि बगोदर में जीटी रोड है जो छह लेन बन रहा है. यहां के रैयतों को मुआवजा दिये जाने में कोताही बरती जा रही है. उन्होंने बताया कि यहां के 80 फीसदी रैयतों को मुआवजा मिल गया है केवल 20 फीसदी रैयतों को अब तक आवासीय दर पर मुआवजा नहीं मिला है. इस पर भू-राजस्व मंत्री जगरनाथ महतो ने कहा कि यहां भूमि को लेकर सरकार और एनएचएआई के बीच विवाद चल रहा है. उन्होंने सरकार द्वारा तय विकल्प के बारे में भी बताया.

उन्होंने बताया कि रैयत चाहे तो पंचायत कराकर मामले का निपटारा कर सकती है. विधायक विनोद सिंह ने कहा कि सरकार अब 1932 का खतियान मांग रही है जबकि, यहां बने ज्यादातर आवास 50 वर्षों पूर्व के बने हुए हैं. मंत्री जगरनाथ महतो ने कहा कि फिलहाल यह मामला अपर समाहर्ता के कोर्ट में लंबित है. मंत्री ने आश्वासन दिया कि दो माह के अंदर इसका समाधान कर दिया जायेगा.

महोदय आंशिक सकरात्मक का मतलब बतायें

सदन की कार्यवाही चल रही थी. नलिन सोरेन अपना सवाल पढ़ रहे थे तभी विधायक सीपी सिंह अपने आसन से उठे और कहा कि महोदय ये आंशिक सकरात्मक का मतलब जरा हमको बतायें. ये असल में होता क्या है? इस पर संसदीय कार्य मंत्री आलमगीर आलम ने कहा कि हमने अधिकारियों से पूछा है कि इस तरह का जवाब क्यों देते हैं? इस परिपाटी को बदलना होगा.

ई-पॉस मशीन के नाम पर हो रहे हैं घोटाले

विधायक प्रदीप यादव ने सदन को बताया कि खाद्य आपूर्ति विभाग में ई-पॉश मशीन के नाम पर घोटाले हो रहे हैं. सरकार ई-पॉश मशीन के जरिये खाद्यान्न का वितरण कर रही है और उसके एवज में कंपनी को प्रति वर्ष मशीन की कीमत से भी अधिक 50 करोड़ रुपये का भुगतान कर रही है. सरकार इसके लिये वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं करती है. आमलोगों का करोड़ो रुपये बेकार जा रहे हैं.

इस पर मंत्री रामेश्वर उरांव ने सदन को जानकारी दी कि घोटाले की शंका उन्हें भी है लेकिन, कंपनी से अगस्त 2020 तक करार है. करार अभी तोड़ा नहीं जा सकता है. करार खत्म होते ही सरकार को केवल मेंटेनेंस में सालाना 22 करोड़ रुपये खर्च करना होगा. जिसके लिए सरकार पूरी तरह से तैयार है. सरकार मशीन का एसेसमेंट भी करा चुकी है.

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