खास बातें:-
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देशभर में कोयला कर्मियों की हड़ताल असरदार
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400 करोड़ का कारोबार हो सकता है प्रभावित
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ढ़ाई लाख से अधिक कामगार हड़ताल में शामिल
रांची: कॉमर्शियल माइनिंग की इजाजत देने को लेकर केंद्र सरकार और श्रमिक संगठनों में तकरार है. इसके खिलाफ कोयला उद्योग में विभिन्न श्रमिकों संगठनों द्वारा आहूत तीन दिवसीय हड़ताल का आह्वान किया गया है.
हड़ताल के पहले दिन गुरुवार को देशभर के खनन क्षेत्रों में खासा असर देखा गया. झारखंड में भी सुबह से ही सीसीएल, बीसीसीएल व ईसीएल में मजदूर संगठनों ने प्रतिनिधि सड़क पर उतरकर आंदोलन कर रहे हैं.
पांच प्रमुख श्रमिक संगठनों इंटक, एटक, सीटू, एचएमएस और बीएमएस द्वारा आहूत हड़ताल के दौरान सभी खनन क्षेत्रों में कामगारों ने काम बंद कर सड़क पर उतर कर प्रदर्शन किया.
श्रमिक संगठनों की ओर से दावा किया गया है कि हड़ताल से देश भर में करीब 400 करोड़ का कारोबार प्रभावित हो रहा है. झारखंड में भी करीब एक लाख 20 हजार से अधिक श्रमिकों ने काम बंद रखा है और राज्य में भी लगभग 225 करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ है. राज्य में अधिकांश खदानें सीसीएल और बीसीसीएल की है, जो धनबाद, बोकारो, गिरिडीह, रामगढ़ और चतरा जिले में स्थित है.
ट्रेड यूनियनों का कहना है कि सरकार कोयला उद्योग को पुरानी स्थिति में पहुंचाना चाहती है, यह मजदूरों के हित में नहीं है. जब तक सरकार कॉमर्शियल माइनिंग की नीति वापस नहीं लेती, तबतक हड़ताल वापस नहीं होगा. राजधानी रांची में भी सीसीएल और सीएमपीडीआई मुख्यालय के बाहर श्रमिक संगठन के प्रतिनिधियों ने प्रदर्शन किया.
देश की कोयला राजधानी धनबाद में भी हड़ताल का खासा असर देखा गया. सुबह प्रथम पाली में मजदूरों ने हाजरी नहीं बनायी. सुबह 8 बजे मजदूर कोलियरी खदान और परियोजना स्थल पर जरूर पहुचे, लेकिन किसी ने भी हाजरी नहीं बनाया.
जिले के गोविंदपुर क्षेत्र के एकीकृत ब्लॉक फॉर गोविंदपुर, न्यू आकशकिनारी, जोगिडीह के अलावा कतरास क्षेत्र के रामकनाली, केशलपुर, चैतूडीह, एकेडब्लूएमसी सहित अन्य कोलियरियों में काम पूरी तरह से ठप रहा.
संयुक्त मोर्चा की हड़ताल को ले मजदूर संगठनों ने गिरिडीह के सीसीएल माइंस व अन्य स्थानों पर किया विरोध प्रदर्शन किए. बोकारो, चतरा, गिरिडीह समेत अन्य जिलों में भी हड़ताल का व्यापक असर देखा जा रहा है.
कोल इंडिया लिमिटेड की उत्पादक अनुषंगी कंपनियां-
- ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल)
- भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल)
- सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल)
- वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (डब्ल्यूसीएल)
- साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल)
- नार्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल)
- महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एमसीएल)
श्रमिक संगठनों की आशंकाएं निराधार-
केंद्रीय कोयला मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि कॉमर्शियल माइनिंग के मामले में श्रमिक संगठनों की आशंकाएं निराधार हैं. जोशी ने कहा कि कॉमर्शियल माइनिंग से कोल इंडिया का दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है.
कोल इंडिया देश में कोयला उत्पादन की सबसे बड़ी कंपनी थी, है और रहेगी. आत्मनिर्भर भारत के लिए राष्ट्र को बिजली चाहिए, जो पर्याप्त कोयले के बिना संभव नहीं है. कोल इंडिया पर भारत को गर्व है. जो देश ही नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी है.
अकेले देश का 80% से अधिक कोयला निकाल रही है. फिर भी देश को सालाना लगभग 250 मिलियन कोयले का आयात करना पड़ता है. अपने देश में पर्याप्त कोयला रहते हुए कोयले का आयात किसी पाप से कम नहीं है. इसी मांग एवं आपूर्ति के अंतर को कम करने के लिए कॉमर्शियल माइनिंग के लिए ऑक्शन की प्रक्रिया शुरू की गई है.
कोल इंडिया के पास 447 कोल ब्लॉक-
कोल इंडिया के अध्यक्ष प्रमोद अग्रवाल ने कहा कि कंपनी के पास 447 कोल ब्लॉक हैं, जिसमें सुचारू रूप से खनन कार्य किया जाता है. इसके अतिरिक्त कोल इंडिया को 16 और कोल माइंस आंवटित किये गये हैं, जिसमें कोल माइंस (विशेष प्रावधान) अधिनियम के अंतर्गत 10 खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम के तहत 6 ब्लॉक शामिल हैं.
सभी 463 ब्लॉकों की संयुक्त क्षमता 170 बिलियन टन (बीटी) के करीब है. वर्तमान में आवंटित 16 ब्लॉक में से अधिकांश की उत्पादन क्षमता 10 मिलियन टन (एमटी) वार्षिक से अधिक है. कुल क्षमता 264 एमटी के लगभग है. वित्तीय वर्ष 2023-24 तक कोल इंडिया का 1 बिलियन टन कोयले का उत्पादन और आपूर्ति करने का लक्ष्य है. इसी प्रकार आगे भी सतत अग्रसर रहेगा.
247 मिलियन टन कोयले का आयात-
देश में वित्तीय वर्ष 2019-20 में 247 मिलियन टन कोयले का आयात किया गया था, जिसमें से 52 मिलियन टन कोकिंग कोल था. शेष 195 मिलियन टन नॉन-कोकिंग कोल था.
कोल इंडिया अपनी क्षमता और परिसंचालन को कुशल बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है. कंपनी राज्य और केंद्र सरकार के साथ कार्य करते हुये न सिर्फ विभिन्नर समस्यांओं एवं चुनौतियों पर सकारात्म क पहल से निरंतर निपटारा कर रहा है, बल्कि अपना उत्पादन और आपूर्ति को गति दे रहा है.
श्रमिक संगठनों की मांगें-
कोल इंडिया का निजीकरण रद्द हो, कॉमर्शियल माइनिंग बंद हो, सीएमपीडीआइ को कोल इंडिया से अलग नहीं हो, मेडिकल अनफिट योजना (9:4:0) को लागू किया जाए, एचपीसी लागू किया जाए.

