संवाददाता,
रांची: राज्यपाल द्रौपदी मुरमू ने कहा है कि चिकित्सक राज्य की जनता के लिए रोल मॉडल बनें. चिकत्सक समर्पित भाव से मरीजों का ईलाज करें. मानवता की सेवा से बड़ा कोई अन्य पुनीत कार्य नहीं है. उन्होंने कहा कि चिकत्सकगण मरीजों के साथ अच्छा व्यवहार करें. उन्हें मरीजों को सही जानकारी प्रदान करनी चाहिए और बेवजह परेशान नहीं करना चाहिये. राज्य भर के चिकित्सक मरीजों एवं उनके परिवारवालों के प्रति सहानुभूति रखें. उन्होंने कहा कि चिकित्सकों को ग्रामीण क्षेत्रों में भी अपनी सेवाएं देनी चाहिए. राज भवन में वृहस्पतिवार को स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा के दौरान राज्यपाल ने यह बातें कहीं.
राज्यपाल ने कहा कि लोगों के स्वास्थ्य और पोषण की ओर ध्यान देना जरूरी है. उन्होंने कहा कि राज्य की बहुत-सी महिलाएं एनीमिया से ग्रसित हैं, जिस पर नियंत्रण आवश्यक है. उन्होंने कहा कि बहुत-से बच्चे कुपोषण के शिकार हैं. लोगों को अपने खान-पान पर भी ध्यान देना चाहिये. उन्होंने कहा कि पूर्व में लोग सहजन, मुनगा के पत्तों, लाल साग, कोयनार साग खाते थे. अब इसे खाने का प्रचलन समाप्त हो गया है, इस भोजन में पौष्टिकता प्राप्त होती थी. स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव डॉ नीतिन कुलकर्णी ने कहा कि लोग अपने आहार में पौष्टिक भोजन नहीं ले रहे हैं. उन्होंने कहा कि दुमका, हजारीबाग और पलामू में नये मेडिकल कालेज में इस साल से पढ़ाई प्रारंभ हो गई है. इन महाविद्यालयों की स्थापना से राज्य के जनजाति कोटि के बच्चे भी नामांकन कराकर लाभान्वित हुए हैं. उन्होंने कहा कि राज्य के चिकित्सक ग्रामीण क्षेत्र में नहीं सेवा देना चाहते हैं. अभी एमबीबीएस चिकित्सकों का पदस्थापन विभिन्न क्षेत्रों में किया गया है और विषेशज्ञ चिकित्सकों को सदर अस्पताल में पदस्थापित किया गया है.
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के कार्यान्वयन की समीक्षा के क्रम में कहा गया कि गर्भवती महिलाओं की न्यूनतम चार जांच नहीं हो रही है, इसकी वजह से ही एनिमिया पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है. उन्होंने कहा कि 90 फीसदी बच्चों का टीकाकरण हो चुका है. राज्यपाल ने आंगनबाड़ी सेविका, सहायिका को भी टीकाकरण कार्यक्रम से जोड़ने की बातें कहीं.
स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि आयुष्मान भारत कार्यक्रम के तहत 1.30 लाख लोगों का इलाज किया गया, जिस पर 220 करोड़ खर्च हुए. 57 लाख लोगों को योजना से जोड़ा गया है. सभी को निशुल्क गोल्डेन कार्ड दिया गया है. जनजातीय क्षेत्र के अस्पतालों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त राशि सरकार मुहैया करा रही है. उन्होंने कहा कि सभी 24 जिलों में सिजेरियन ऑपरेशन की सुविधा बहाल कर दी गयी है. यहां पर परिवार नियोजन कार्यक्रम भी चल रहा है. मलेरिया, चिकनगुनिया, कालाजार पर भी नियंत्रण पाया जा चुका है. कालाजार से चार जिले प्रभावित हैं, जिन्हें मुक्त करना है. टीबी के इलाज हेतु निशुल्क दवा के साथ 500 रुपये की सहायता राशि भी दी जा रही है. राज्य भर में सर्वाईकल कैंसर के रोगियों की पहचान कर, उन्हें बेहतर उपचार देने की कोशिश की जा रही है.

