रांची:- केंद्रीय कृषि कानूनों और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के काफिले पर हमले के विरोध में आज रांची में जन आक्रोश रैली का आयोजन किया गया है. इस महारैली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राज्य के वित्त तथा खाद्य आपूर्ति मंत्री रामेश्वर उरांव और कृषि मंत्री बादल समेत अन्य दलों के नेता उपस्थित थे.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डाॅ0 रामेश्वर उरांव ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि डोना देबे, लेकिन कोना नहीं देबे, अर्थात घर आने वाले अतिथियों को भोजन-पानी देकर उनका स्वागत जरूर करें, परंतु जमीन न दें. उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज के लिए जमीन उसकी अस्मिता और पहचान का प्रतीक है, जमीन छीन जाएगा, तो सबकुछ खत्म हो जाएगा. प्रदेश अध्यक्ष ने एक बार फिर दोहराया कि वे खुद भी अपने आप को बिहारी मानते है, लंबे समय तक बिहार राज्य के निवासी के रूप में उनकी पहचान रही, वर्ष 2000 में अलग झारखंड राज्य का गठन हुआ. उत्तर प्रदेश हो या तमिलनाडु हो अथवा किसी अन्य राज्य से लोग आये, सभी का झारखंड में स्वागत है, लेकिन आदिवासियों की जमीन की छूट नहीं दी जा सकती.
डाॅ0 उरांव ने कहा कि 1912 में बंगाल से झारखंड अलग हुआ, जबकि 1932 में ओड़िशा अलग हुआ और अंग्रेजी शासन में झारखंड को भी अलग राज्य बनाने का वायदा किया गया था, परंतु इस बीच द्वितीय विश्व युद्ध शुरू हो जाने के कारण अलग झारखंड राज्य नहीं बन पाया, बाद में दिशोम गुरू शिबू सोरेन, शहीद निर्मला महतो समेत अन्य ने अपनी कुर्बानी देकर अलग झारखंड राज्य का गठन कराया. प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि जिस तरह से एक षड़यंत्र के तहत मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के काफिले को पिछले दिनों रांची में रोकने की कोशिश की गयी और सुरक्षाकर्मियों और आम लोगों पर हमला करने की कोशिश की गयी, उससे साफ हो जाता है कि भाजपा नेताओं द्वारा देशभर में गैर भाजपाई सरकार को अस्थिर करने की कोशिश की जा रही है, मध्यप्रदेश, कर्नाटक समेत कई राज्यों में जबरन सत्ता हथिया लिया गया, झारखंड में भी कोशिश की गयी, लेकिन यह सफल नहीं होने पर सरकार को बदनाम करने की साजिश शुरू की गयी.
किसानों के देशव्यापी आंदोलन के बारे में डाॅ0 रामेश्वर उरांव ने कहा कि पार्टी कृषि कानून के खिलाफ आंदोलन जारी रखेगी. उन्होंने कहा कि नये कृषि कानून से जमाखोरी को बढ़ावा मिलेगा, इसके खिलाफ संघर्ष तेज करने की जरूरत है.
यह रैली केंद्रीय कृषि कानूनों व मुख्यमंत्री के काफिले पर हुए हमले के विरोध में निकाला गया,जिसमें संख्या में लोवाडीह स्थित दुर्गा सोरेन चैक पर लोगों के शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है. इसका आयोजन लोवाडीह के हाईटेंशन मैदान में किया जा रहा है. बताया जा रैली के कारण कांटाटोली से दुर्गा सोरेन चैक तक यातायात व्यवस्था प्रभाावित रह सकती है. हालांकि पुलिस प्रशासन के द्वारा इसके लिए विशेष इंतजाम भी किया गया है. इस विरोध रैली में रांची के कई सोसाइटी भी शामिल हुए. वहीं, हिंदपीढ़ी की अमन यूथ सोसाइटी ने भाी इस रैली के समर्थन में हिस्सा लिया. सोसाइटी ने कहा कि झारखंड प्रदेश के आदिवासी मूलवासी मुख्यमंत्री का काफिला रोकने की कोशिश करने के खिलाफ एवं कृषि कानून के विरोध में हिंदू-मुस्लिम-सिख-ईसाईआदिवासी एवं सर्वधर्म समाज के द्वारा समर्थन किया जा रहा है. हिन्दपीढ़ी के लोग भी अमन यूथ सोसाइटी के बैनर तले बड़ी संख्या में रैली में हिस्सा लिये.

