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9 महीनों में दहेज लोभियों ने ले ली 216 बेटियों की जान

by bnnbharat.com
December 12, 2020
in समाचार
दहेज प्रथा: जरूरत है जोश और हिम्मत की……
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रांची: हर मां-बाप की ख्वाहिश होती है कि उसकी देहरी से उसकी बेटियां के हाथ पीले अच्छे से हो जाए, उनका दामाद घुड़चढ़ी करके उनके दरवाजे पर आए. सारी रस्म की अदायगी हो और फिर वह अपनी ही बेटी को लाल जोड़े में विदा करें. यही हसरत लिये एक पिता अपनी बेटी की शादी करता है. पर उसे नहीं मालूम कि जिस घर में उसकी बेटी ब्याही जा रही है वे लोग दहेज के लोभी हैं. शादी के पांच दिन बाद से ही दहेज लोभी बहु को प्रताड़ित करना शुरू कर देते हैं. बेटी, दु:ख सहती है क्योंकि, वो अपने माता-पिता की लाज रख रही है. बेटी जानती है कि उसके पिता ने किस तरह से उसकी शादी की है. यह सोच-सोच कर बेटी दु:ख सहती रहती है पर एक दिन उससे नहीं रहा गया और मां को फोन कर रोने लगती है और रोते-रोते कहती है ‘मां ये लोग मुझे मार डालेंगे….’ जब तक मां अपनी बेटी का दु:ख समझ पाती तब तक फूलो इस दुनियां से जा चुकी थी. दहेज लोभियों ने 20 साल की बेटी की जान ले ली. यह कोई एक फूलो की कहानी नहीं है. बल्कि, हर 10 में से चार घर में इस तरह की घटनाएं हो रही हैं.

राज्य में दहेज प्रथा के मामलों में कमी

राजधानी रांची और पूरे राज्य में लगातार दहेज प्रथा या उससे जुड़े मामलों में कमी आई है. झारखंड पुलिस के आंकड़ों के हिसाब से जनवरी से लेकर सितंबर तक राजधानी रांची में अब तक कुल 12 महिलाओं की दहेज के लिए हत्या की गयी है.

पिछले वर्ष भी 12 मामलें ही रिपोर्ट किए गए थे. इस वर्ष पूरे झारखण्ड राज्य की बात करें तो अब तक कुल 216 मामले रिपोर्ट किए जा चुके हैं. वहीं पिछले वर्ष 301 महिलाओं को दहेज के लिए मौत के घाट उतार दिया गया था.

राजधानी रांची में वर्ष 2019 और 2020 में हुए दहेज के मामले

 20202019
जनवरी01
फरवरी00
मार्च02
अप्रैल20
मई12
जून24
जुलाई20
अगस्त30
सितंबर22
अक्टूबर00
नवंबर00
दिसंबर01
कुल1212

पूरे राज्य में वर्ष 2019 और 2020 में हुए दहेज के मामले

 20202019
जनवरी2226
फरवरी2013
मार्च1820
अप्रैल2019
मई2044
जून3431
जुलाई2728
अगस्त3129
सितंबर2421
अक्टूबर015
नवंबर023
दिसंबर032
कुल216301

क्या होती है दहेज प्रथा

विवाह के वक्त वधू के परिवार की तरफ़ से वर को नकद या वस्तु के रूप में दिए जाने की प्रक्रिया को दहेज प्रथा कहा जाता है. वधू के परिवार द्वारा नक़द या वस्तुओं के रूप में यह वर के परिवार को वधू के साथ दिया जाता है. आज के आधुनिक समय में भी दहेज़ प्रथा समाप्त नहीं हुआ है.

क्यों होती है दहेज के लिए हत्या

दहेज प्रथा के मामलों में दहेज न देने पर तो लड़की का उत्पीड़न किया ही जाता है, दहेज देने के बाद भी वर पक्ष इस बात को लगातार शिकायत करता है कि उसे अपेक्षा से कम दिया गया. इसके बाद से लड़की का उत्पीड़न शुरू हो जाता है और इसका प्रभाव वधू के मूल परिवार पर भी पड़ता है. अनेक मामलों में यह उत्पीड़न जलाकर या अन्य बर्बर कृत्यों द्वारा उसकी हत्या तक पहुंच जाती है. वधू को अक्सर जीवित जला कर मार दिया जाता है. दहेज हत्या के अनेक मामले ऐसे होते हैं, जिसमें लड़की यातना एवं उत्पीड़न सह नहीं पाती हैं और आत्महत्या कर लेती है.

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