रांची: हर मां-बाप की ख्वाहिश होती है कि उसकी देहरी से उसकी बेटियां के हाथ पीले अच्छे से हो जाए, उनका दामाद घुड़चढ़ी करके उनके दरवाजे पर आए. सारी रस्म की अदायगी हो और फिर वह अपनी ही बेटी को लाल जोड़े में विदा करें. यही हसरत लिये एक पिता अपनी बेटी की शादी करता है. पर उसे नहीं मालूम कि जिस घर में उसकी बेटी ब्याही जा रही है वे लोग दहेज के लोभी हैं. शादी के पांच दिन बाद से ही दहेज लोभी बहु को प्रताड़ित करना शुरू कर देते हैं. बेटी, दु:ख सहती है क्योंकि, वो अपने माता-पिता की लाज रख रही है. बेटी जानती है कि उसके पिता ने किस तरह से उसकी शादी की है. यह सोच-सोच कर बेटी दु:ख सहती रहती है पर एक दिन उससे नहीं रहा गया और मां को फोन कर रोने लगती है और रोते-रोते कहती है ‘मां ये लोग मुझे मार डालेंगे….’ जब तक मां अपनी बेटी का दु:ख समझ पाती तब तक फूलो इस दुनियां से जा चुकी थी. दहेज लोभियों ने 20 साल की बेटी की जान ले ली. यह कोई एक फूलो की कहानी नहीं है. बल्कि, हर 10 में से चार घर में इस तरह की घटनाएं हो रही हैं.

राज्य में दहेज प्रथा के मामलों में कमी
राजधानी रांची और पूरे राज्य में लगातार दहेज प्रथा या उससे जुड़े मामलों में कमी आई है. झारखंड पुलिस के आंकड़ों के हिसाब से जनवरी से लेकर सितंबर तक राजधानी रांची में अब तक कुल 12 महिलाओं की दहेज के लिए हत्या की गयी है.

पिछले वर्ष भी 12 मामलें ही रिपोर्ट किए गए थे. इस वर्ष पूरे झारखण्ड राज्य की बात करें तो अब तक कुल 216 मामले रिपोर्ट किए जा चुके हैं. वहीं पिछले वर्ष 301 महिलाओं को दहेज के लिए मौत के घाट उतार दिया गया था.
राजधानी रांची में वर्ष 2019 और 2020 में हुए दहेज के मामले
| 2020 | 2019 | |
| जनवरी | 0 | 1 |
| फरवरी | 0 | 0 |
| मार्च | 0 | 2 |
| अप्रैल | 2 | 0 |
| मई | 1 | 2 |
| जून | 2 | 4 |
| जुलाई | 2 | 0 |
| अगस्त | 3 | 0 |
| सितंबर | 2 | 2 |
| अक्टूबर | 0 | 0 |
| नवंबर | 0 | 0 |
| दिसंबर | 0 | 1 |
| कुल | 12 | 12 |
पूरे राज्य में वर्ष 2019 और 2020 में हुए दहेज के मामले
| 2020 | 2019 | |
| जनवरी | 22 | 26 |
| फरवरी | 20 | 13 |
| मार्च | 18 | 20 |
| अप्रैल | 20 | 19 |
| मई | 20 | 44 |
| जून | 34 | 31 |
| जुलाई | 27 | 28 |
| अगस्त | 31 | 29 |
| सितंबर | 24 | 21 |
| अक्टूबर | 0 | 15 |
| नवंबर | 0 | 23 |
| दिसंबर | 0 | 32 |
| कुल | 216 | 301 |
क्या होती है दहेज प्रथा

विवाह के वक्त वधू के परिवार की तरफ़ से वर को नकद या वस्तु के रूप में दिए जाने की प्रक्रिया को दहेज प्रथा कहा जाता है. वधू के परिवार द्वारा नक़द या वस्तुओं के रूप में यह वर के परिवार को वधू के साथ दिया जाता है. आज के आधुनिक समय में भी दहेज़ प्रथा समाप्त नहीं हुआ है.
क्यों होती है दहेज के लिए हत्या

दहेज प्रथा के मामलों में दहेज न देने पर तो लड़की का उत्पीड़न किया ही जाता है, दहेज देने के बाद भी वर पक्ष इस बात को लगातार शिकायत करता है कि उसे अपेक्षा से कम दिया गया. इसके बाद से लड़की का उत्पीड़न शुरू हो जाता है और इसका प्रभाव वधू के मूल परिवार पर भी पड़ता है. अनेक मामलों में यह उत्पीड़न जलाकर या अन्य बर्बर कृत्यों द्वारा उसकी हत्या तक पहुंच जाती है. वधू को अक्सर जीवित जला कर मार दिया जाता है. दहेज हत्या के अनेक मामले ऐसे होते हैं, जिसमें लड़की यातना एवं उत्पीड़न सह नहीं पाती हैं और आत्महत्या कर लेती है.

