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सपना हुआ सच: शादी के दिन मिला अनोखा तोहफा

by bnnbharat.com
June 22, 2020
in Uncategorized
सपना हुआ सच: शादी के दिन मिला अनोखा तोहफा

सपना हुआ सच: शादी के दिन मिला अनोखा तोहफा

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नीता शेखर,

“ओ बाबुल प्यारे रोए पायल की छनछन, सिसके सांसो की सरगम, निस दिन तुम्हें पुकारे मन”! रेडियो पर यह गाने की आवाज आ रही थी. प्रीता भी गाना सुनकर कहीं खो सी गई थी. आज उसे अपने पापा की बहुत याद आ रही थी. कितना अच्छा परिवार था उनका. कहीं किसी बात का तनाव नहीं था. रीता दो भाई बहन थी. आपस में दोनों भाई बहन की खूब पटती थी. तभी पाकिस्तान से युद्ध शुरू हो गया.

प्रीता के पापा नेवी में थे, ऐसे भी नेवी वालों का जीवन कुछ अलग ही होता है, प्रीता अपनी मम्मी और भाई के साथ नेवी नगर मुंबई में रहती थी.

रात के करीब 10:00 बजे थे. सारे कॉलोनी में अंधेरा कर दिया गया. अचानक सायरन की आवाज तेज हो चली थी. सारी नेवी वाले अपनी वर्दी पहन कर निकल चुके थे.

प्रीता के पापा भी निकल चुके थे. प्रीता को अपने पापा से बहुत लगाव था. दोनों तरफ से लड़ाई हो रही थी. अचानक जिस जहाज पर प्रीता के पापा थे उस पर पाकिस्तान ने हमला कर दिया. इस हमले में काफी लोग जहाज के मारे गए.

कुछ लोग समंदर में कूद गए. जिनका पता ही नहीं चला. जब पाकिस्तान से युद्ध खत्म हो गई और भारत जीत गया, तब मालूम नहीं कितने सैनिकों के घर उजड़ चुके थे. युद्ध में प्रीता के पापा का भी कुछ पता नहीं चला. बहुत खोजबीन के बाद भी उनका पता नहीं चला.

उन लोगों की हस्ती खेलती दुनिया तबाह हो गई थी, अब तो घर में ऐसी शांति छा गई थी जैसे उस घर में कोई रहता ही नहीं था.

प्रीता की मम्मी को नेवी के स्कूल में ही नौकरी मिल गई थी. प्रीता ने नेवी ही ज्वाइन करने का सोचा, उसे लगा मैं अपने पापा के सपनों को साकार कर पाऊंगी.

फिर उसने मेडिकल करके नेवी में ही डॉक्टर बन गई. उसने अपने आप को देश सेवा के लिए अर्पित कर दिया था. प्रीता को हमेशा लगता उसके पापा उसके साथ हैं. एक दिन अस्पताल में काम करते-करते उसे समय का पता ही नहीं चला. रात के लगभग 2:00 बज रहे थे. डॉक्टर मानस उसी अस्पताल में काम करते थे. जब डॉक्टर मानस राउंड पर निकले तो प्रीता को इतनी रात को काम करते देखकर चकित हो गये, उन्होंने जाकर अपना परिचय दिया, प्रीता ने भी अपना परिचय दिया. फिर धीरे-धीरे दोनों में दोस्ती हो गई. देखते-देखते बात शादी तक पहुंच गई. प्रीता को यह गाना “बाबुल प्यारे” बहुत ही पसंद था. वह इस गाने को हमेशा सुना करती थी. जब भी वह इस गाने को सुनती अपने पापा की यादों में खो जाती थी.

आज प्रीता की शादी मानस से हो रही थी. उसके पापा को लापता हुए लगभग 8 साल हो चुके थे. शादी के दिन उसको बार-बार अपने पापा की याद आ रही थी पर वह जानती थी कि उसके पापा कभी वापस नहीं आ सकते. यही सोचते-सोचते अचानक उसे लगा पापा सामने खड़े हैं. वह अपने पापा से लिपट कर रो पड़ी. वह बार-बार पूछ रही थी, पापा आप कहां चले गए थे. हम सब को छोड़कर और बातें किए जा रही थी. उसे ऐसा लग रहा था जैसे कि सारी बातें आज ही कर लेगी.

वह अपने पापा की याद में खो गई थी, उसे कुछ सुनाई नहीं दे रहा था. अचानक उसे झटका लगा. उसकी आंखें खुल गई थी. उसके पापा दिखाई नहीं दिए. उसने सोचा अभी तो पापा मेरे सामने खड़े थे. मैंने उनसे कितनी बातें करी फिर ऐसा कैसे हो सकता है. अभी वह सोच रही थी कि दरवाजे के पिटने की आवाज सुनाई दी. उसने झट से दरवाजा खोला. सामने मां खड़ी थी. मां को देख कर प्रीता उनसे लिपट गई, फिर अपनी मां को सारी बातें बताई. उसकी मां को भी यकीन नहीं हो रहा था. फिर उन्होंने प्रीता से शादी के लिए तैयार होने को कहकर खुद तैयारियों में लग गई.

बारात दरवाजे पर पहुंच गई, प्रीता को वही गाने की आवाज “बाबुल प्यारे” सुनाई दे रही थी. अपने आपको संभाल नहीं पा रही थी. उसको आंखों से आंसू भी झर झर कर बह रहे थे. तभी हलचल सी मची. 10, 20 नेवी के सिपाही किसी को लेकर आ रहे थे.  वह किसी को व्हील चेयर पर बिठा कर ला रहे थे. वहां पर पूरी हलचल हो चली थी. आज बरसों बाद उसके पापा अचानक सामने आ गए थे. प्रीता को तो विश्वास ही नहीं हो रहा था. उसने जो सपना देखा था सामने आ गया था. जल्दी से वह अपने पापा के गले में लिपट गई. प्रीता के पापा युद्ध में बुरी तरह घायल हो गए थे. उनको पाकिस्तानियों ने पकड़ लिया था और वहां के आर्मी हॉस्पिटल में डाल दिया था. उनको काफी टॉर्चर करते थे. कैसे तो एक पाकिस्तानी डॉक्टर का दिल पिघल गया. वह चुपके-चुपके बिना किसी को बताए उनकी मदद कर रहा था. फिर जब वह ठीक हो गए तो उसने चुपके से वीजा और पासपोर्ट का इंतजाम करके भेज दिया.

लेकिन इतना कुछ करते करते 8 साल गुजर गए, सभी ने कहा जो हुआ उसे भूल जाइए. आज आपकी बेटी की शादी है. चलिए कन्यादान करने का समय हो चुका है. आज प्रीता बहुत बहुत खुश थी. उसको ऐसा लग रहा था मानो सारे जहां की खुशियां उसे मिल गई हो.

प्रीता की शादी हो गई. वह अपने घर आ गई थी, मानव जैसा पति पाकर वह काफी खुश थी. क्योंकि उसके आने से ही उसके पापा वापस आ गए थे, ऐसा उसे लगता था.

प्रीता जब अस्पताल से लौटी तो फिर से यही गाना रेडियो पर बज रहा था “ओ बाबुल प्यारे” रेडियो बंद कर दिया. आज से यह गाना वह कभी नहीं सुनेगी. उसके पापा जो वापस आ गए थे. फिर से उसके जीवन में बाहर आ गई थी, आज फिर से उनका परिवार हरा भरा हो गया था.

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