शशि भूषण दूबे कंचनीय,
लखनऊ: फतेहपुर 23सितम्बर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत जनता को गड्ढा मुक्त सड़क का सपना दिखाने वाली सरकार का दावा विभागीय जिम्मेदार अधिकारियों की नीतियों के चलते खोखला साबित हो रहा है. ग्रामीण सड़कें अपनी दुर्दशा की कहानी खुद ही बयां कर रही हैं.
ऐसी ही दुर्दशा की शिकार दर्जन भर से अधिक गांवों को जोड़ने वाली सड़क धाता क्षेत्र के बेलांवा, उरई, अढैया, सलेमपुर, मोदापुर , रानीपुर, दामपुर एवं मखौवा का है. इस मार्ग पर आवागमन करना जान-जोखिम में डालना है.
दामपुर वह मखौवा मोरंग खदान के करीब आधा दर्जन मोरंग खण्ड एवं करीब एक दर्जन गांवों की इकलौती मुख्य सड़क आजादी के 73 साल बाद भी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है. क्षेत्रवासियों को कार, एंबुलेंस व अन्य संसाधनों से निकलना दूभर हो गया है. इस सड़क से प्रतिदिन हजारो से अधिक की संख्या में लोग आना-जाना करते हैं.
क्षेत्र के प्रधान सैदपुर ओम नारायण निषाद, लल्लू सिंह निषाद, हरिमोहन सिंह, सलेमपुर, पूर्व प्रधान शिवभूषण सिंह ,मुंशी तिवारी उरई से छेदी लाल सिंह, समर सिंह ,गुड्डू सिंह, कुलदीप सिंह, जितेंद्र सिंह, लवलेश सिंह आदि ने बताया कि इस सड़क से प्रतिदिन हजारों की संख्या में राहगीर थाना वह ब्लाक से लेकर जिला मुख्यालय के लिए निकलते हैं. सड़क अब पूरी तरह टूट कर गड्ढों में तब्दील हो गयी है. थोड़ी भी बारिश होने पर तालाब की शक्ल में नजर आने लगती है. इसके बाद भी क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि, जिम्मेदार अधिकारी इस क्षेत्र के विकास एवं इस मुख्य सड़क के लिए कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं, जबकि शासन को इस क्षेत्र से चलने वाली मौरंग खदान से प्रतिदिन लाखों का राजस्व मिलता है, जिसका कुछ हिस्सा क्षेत्र के विकास में लगाने का प्रावधान भी है, परन्तु आज तक मौरंग खदान के राजस्व से मिलने वाले अंश से क्षेत्र में विकास के नाम पर लूट के सिवा कुछ भी नही हो सका है.

