रांची: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने देश की सीमा की सुरक्षा को लेकर उत्पन्न परिस्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भारत और चीन सीमा के मुद्दे पर परस्पर विरोधी बयानों के कारण सेना का मनोबल बढ़ने की बजाय गिरा है.
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता आलोक कुमार दुबे ने कहा कि एक तरफ प्रधानमंत्री यह कह कर पूरे देश को गुमराह कर रहे हैं कि ना कोई हमारी सीमा में आए हैं और ना ही हमारी जमीन पर कब्जा किया वहीं दूसरी तरफ उनके मंत्री वीके सिंह अपने ही देश को चीन की सीमाओं पर अतिक्रमण करने का जिम्मेवार ठहरा देते हैं.
उन्होंने कहा कि अप्रैल 2020 में हमारी सरजमी पर चीनी घुसपैठ की साजिश के बाद आज तक 56 इंच में है ना तो चीन शब्द का इस्तेमाल किया और ना ही डेपसांग प्लेन,गोगरा हाट, स्प्रिंग सेक्टर, पैंगोंग प्सो लेक इलाके व चुमुर दक्षिणी लद्दाख से चीनी घुसपैठ को खदेड़ने की कोई नीति ना समय सीमा निश्चित की. राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण पहलू को लेकर क्या प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री ने भारत की भूभागीय अखंडता की सुरक्षा करने की जिम्मेदारी की संपूर्ण विफलता का कारण बताएंगे.क्या केंद्र सरकार यह जवाब देगी कि केवल पैंगोंग प्सो लेक इलाके से ही डिसइंगेजमेंट का समझौता क्यों कर रही है और वह भी भारत के हितों पर कुठाराघात कर तथा भारत के हितों के विरुद्ध एलओसी की रूपरेखा बदल कर.
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता लाल किशोर नाथ शाहदेव ने कहा कि गोगरा हाट स्प्रिंग्स में चीनी घुसपैठ निरंतर बनी है, क्या कारण है कि प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री गोगरा हॉट स्प्रिंग में चीनी घुसपैठ के बारे रहस्यमयी चुप्पी साधे हुए हैं. रिपोर्टस के मुताबिक चीनी सेना चुमुर दक्षिणी लद्दाख तक पेट्रोलिंग कर रही है. क्या कारण है कि प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री राष्ट्रीय सुरक्षा के इस महत्वपूर्ण मुद्दे को लेकर एक शब्द भी नहीं बोल रहे हैं,गद्दारों ने भारत माता को चीरकर एक टुकड़ा चीन को दे दिया है ऐसा देशवासियों का मानना है.
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता राजेश गुप्ता छोटू ने कहा कि भारत ने सदैव फिंगर 8 को भारत चीन के बीच लाइन ऑफ कंट्रोल माना है,आज रक्षा मंत्री के बयान के मुताबिक भारत की सेना अब फिंगरर 3 तक सीमित हो जाएगी,क्या यह सीधे-सीधे भारत के हितों पर कुठाराघात कर लाइन ऑफ कंट्रोल को पुनर्गठित करने का कार्य नहीं है. क्या प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री देश को बताएंगे कि भारतीय सेना को कैलाश रेंजर्स पर अपनी प्रभावी और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मौजूदगी से वापस का समझौता क्यों किया जा रहा है जबकि यहां पर भारत चीन के मुकाबले कहीं अधिक मजबूत स्थिति में है.

